जयकारों के साथ आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. गंगाशहर से विहार कर भीनासर पधारे
जीवन में सत्य को धारण करो- आचर्य


बीकानेर। मन, वचन और काया की एकरूपता ही सत्य है। सत्य में शक्ति है, शान्ति है और सुरक्षा है। सत्य में जीने पर सन्मति और मरने के बाद सद्गति प्राप्त होती है और जो सत्य का जीवन नहीं जीते हैं, उन्हें जीते जी सन्मति और मरने के बाद सद्गति नहीं होती है। श्री शान्त क्रान्ति जैन श्रावक संघ के 1008 आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने भीनासर के डालचन्द, कानीराम गिन्नी के निवास पर व्याख्यान देते हुए यह बात कही।
आचार्य श्री ने फरमाया कि यह जीवन की विडंबना है, हम दूसरों से यह अपेक्षा करते हैं कि वह हमारे सामने सच बोले लेकिन हम स्वयं ऐसा नहीं करते। यह जीवन की दुरावस्था है। चुप रहने में कुछ भी बुरा नहीं है, लेकिन झूठ से बुरा कुछ भी नहीं है। इसलिए हमारी मानसिकता सत्य से ओतप्रोत होनी चाहिए। हम दूसरों से अपेक्षा करें, लेकिन स्वयं भी सत्य बोलें। मैं यह आप सभी उपस्थित जन से अपेक्षा करता हूं कि आप सब अपने घर में सत्य बोलें और व्यापार में भी झूठ बोलना पड़े तो इसका प्रायश्चित होना चाहिए।
सांड नवकार पौषधशाला से किया विहार
श्री शान्त क्रान्ति जैन श्रावक संघ गंगाशहर-भीनासर के युवा अध्यक्ष महावीर गिडिय़ा ने बताया कि गुरुवार सुबह महाराज साहब ने भीनासर के लिए विहार किया। जय-जयकार, जय-जयकार, विजयगुरु की जय-जयकार, हू.शी.उ.चौ. श्री.ज.ग. ना. ना, विजय चमकते सूर्य समाना, त्रिशला नन्दन वीर की जय बोलो महावीर की, सरीखे जयकारे लगाते श्रावक-श्राविकाऐं और आगे-आगे श्री शान्त क्रान्ति जैन श्रावक संघ के 1008 आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने गुरुवार सुबह चंदा देवी डालचंद सांड चेरिटेबल ट्रस्ट मुंबई- गंगाशहर की सांड नवकार पौषधशाला से जैसे ही विहार किया, गंगाशहर से लेकर भीनासर तक के सैंकड़ो महिलाओं व पुरुषों ने मार्ग में पलकें बिछाकर मंगल भावनाओं से आचार्य श्री का स्वागत-सत्कार किया। इस दौरान महाराज साहब के घरों में पगलिए करने की विनती को सहज ही स्वीकार करते हुए मंगलिक देते हुए आगे बढ़े और खूब धर्म-ध्यान करने, जिन शासन की पालना करने का उपदेश दिया। दोपहर की मंगलिक और धर्म-चर्चा भी कानीराम गिन्नी के निवास पर ही हुई। आचार्य श्री ने सभा में शुक्रवार सुबह करीब 7.30 सुखे समाते होने पर उदयरामसर के लिए विहार करने के भाव रखे।
