नई दिल्ली,( दिनेश शर्मा “अधिकारी “)l प्रदेश में ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत को लेकर मप्र उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार पर नाराजगी जाहिर की है मुख्य न्यायाधीश मो.रफीक और न्यायाधीश अतुल श्रीधरन की डबल बेंच ने तीन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए न्यायाधीशों ने हैरानी जताई कि कैसे कोई अन्य राज्य की आक्सीजन रोक सकता है केंद्र ये सुश्चित करे कि आगे से कोई राज्य ऐसा न कर सके l रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी को लेकर भी सख्ती बरतने की हिदायत दी गई है इस मामले में 28 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी । हाई कोर्ट ने केंद्र व प्रदेश सरकार से 19 बिंदुओं पर की गई कार्यवाही की प्रगति रिपोर्ट भी तलब की है।
जिसमें पूछा कि दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं । मप्र हाईकोर्ट में सोमवार को प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी को लेकर सुनवाई हुई इसमें डबल बेंच ने पूछा कि पूर्व में जारी 19 बिंदुओं के दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं । पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर ने न्यायालय को बताया कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में मप्र के लिए आ रही आक्सीजन को रोका गया था। जिस वजह से सागर में एक मरीज की मौत हो गई। इस मामले में न्यायाधीशों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की जबावदेही है कि हर राज्य को आक्सीजन बिना रूकावट मिले। साथ ही निर्देश दिए कि आगे से ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालबाजारी करने वालो के साथ सख्ती से निपटा जाए। हाईकोर्ट ने पूर्व में जारी निर्देशों के पालन में अब तक उठाए गए कदम के बावत प्रगति रिपोर्ट 28 अप्रैल को अगली सुनवाई में पेश करने का आदेश राज्य व केंद्र सरकार को दिया है।
— ऑक्सीजन की कमी से मौतें:
मप्र उच्च न्यायालय द्वारा कोरोना उपचार को लेकर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई हो रही इस मामले में कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ की ओर से आवेदन दायर किया गया है। उन्होंने न्यायालय को बताया कि ऑक्सीजन की कमी से जबलपुर सहित शहडोल, ग्वालियर, इंदौर और प्रदेश के कई क्षेत्रों में अस्पताल में भर्ती मरीजों की मौत हो चुकी है कोरोना की दूसरी लहर का पीक मई के पहले सप्ताह में आने की आशंका है इसके लिए अभी से इंतजाम किए जाए इंदौर के वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 19 अप्रैल को आदेश जारी कर ऑक्सीजन की आपूर्ति बहाल करने को कहा था, लेकिन ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त नहीं की जा रही है। आवेदन में अनुरोध किया गया है कि उच्च न्यायालय खुद ऑक्सीजन और रेमडेसिविर की आपूर्ति की निगरानी करे इसके साथ ही कोरोना महामारी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की थी।
तीसरी याचिका में कहा सागर की बजाय झांसी भेज दिया:
एडवोकेट बार एसोसिएशन जबलपुर की ओर से लगाई गई तीसरी याचिका में बताया गया कि बोकारो के स्टील प्लांट से एक ऑक्सीजन टैंकर सागर भेजा गया था, लेकिन बीच रास्ते से टैंकर को झांसी भेज दिया गया। सागर में ऑक्सीजन की कमी हो गई जिस वजह से मरीज की मौत हुई*