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समय काल परिस्थिति और अनुकूलता


यह एक बड़ी अहम परिभाषाएं कि व्यक्ति को वही करना चाहिए या यूं कहो कि व्यक्ति वही कर सकता है जो समय काल परिस्थिति और अनुकूलता होती है। इस बात को यु समझे कि आप कोई काम करने जा रहे हैं चाहे मांगलीक हो, व्यापार से संबंधित हो या कोई अन्य कभी समय साथ नहीं देता, मांगलिक कार्य मुहूर्त देख कर करते हैं और व्यापार में हम बाजार की उच्च नीच। फिल्म प्रमोशन करने वाले भी फिल्म की लॉन्चिंग समय काल परिस्थिति और अनुकूलता तीनों को मिलाकर ही कर पाते हैं। कभी-कभी समय ठीक होता है पर परिस्थिति है ऐसी बन जाती है या तो हम उस काम को खुशी-खुशी कर पाते हैं या नहीं कर पाते हैं। और जब परिस्थितियां भी ठीक होती है पर हमारी अनुकूलता नहीं हो पाती या तो हमारी शारीरिक व्याधि आ जाएगी या प्राकृतिक आपदा आ जाएगी यह आर्थिक स्थिति गड़बड़ा जाएगी कुछ भी हो सकता है। इसलिए व्यक्ति ने कभी भी ना तो निराश होना चाहिए नया अत्यधिक खुश होना चाहिए क्योंकि जो भी होता है वह समय परिस्थिति और अनुकूलता के अधीन ही होता है । और यह हमारे हाथ में कभी नहीं होता यह हमारी किस्मत में होता है। हम अपनी योग्यता के बल पर पूरी कोशिश कर समय परिस्थिति और अनुकूलता अपने अनुसार बना सकते हैं। इसलिए हम सब कहते हैं भगवान जो करता है ठीक करता है। कभी-कभी इसमें हमारी किस्मत के साथ हमारी योग्यता हमारी जीत की निशानी होती है।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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