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समो निंदा समो प्रशंसा ! मंत्रराज का अनुसरण आलेख :मोहन लाल भन्साली


क्या धर्मराज युधिष्ठिर को धर्म ध्वजा फहराने के लिए रैलियों की आवश्यकता पड़ी! समग्र भारतवर्ष आपकी धर्मनिष्ठता से गदगद होकर लाभान्वित हुआ।
आज माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के छः साल का कार्यकाल संपन्नता की ओर गतिशील है!
आपने अल्प कार्यकाल में अविस्मरणीय निर्णायक कार्यों को सम्पादित कर कश्मीर में धारा 370, सीएए, राम जन्मभूमि आदि अनेकानेक ज्वलंत समस्याओं के समाधान में जागरूकता के साथ दृढ़संकल्प का संदेश दिया है और विश्व स्तरीय महाविनाशकारी महामारी की विकराल समस्या पर मानवीयता के हित में तत्परता के सजग प्रहरी बनें, और लोकडाउन की दुखदाई घड़ी में भी त्यौहारों जैसा सकारात्मक वातावरण प्रस्फुटित कर आमजन का मनोबल बढ़ाया, संयमित जीवन शैली को आत्मसात किया,” समो निंदा समो प्रशंसा “के मंत्रराज का अनुसरण किया, मित भाष्य का अनुकरणीय प्रयोग किया, जिससे सम्पूर्ण विश्व आपके प्रभावी व्यक्तित्व से प्रभावित हुआ,आकर्षित हुआ और भारत की संप्रभुता के प्रति आस्थावान बना।

क्या आज ऐसे सारगर्भित प्रशंसनीय माहौल में जश्न स्वरुप देशभर में रैलियों, महारैलियों का आयोजन
” सुर्य को दीप दिखानें ” जैसा नहीं होगा?
आज महामारी काल में भारत के नवनिर्माण में एक ऐसे अद्भुत जश्न मनाने के दिन का निर्माण करना चाहिए जिससे भविष्य में सार्वभौमिक जश्न मनाने की अभिलाषा खुद ब खुद सर्वत्र जागृत हो सकें।
इसके लिए:-
हमें सबसे पहले प्रत्येक भारतीय के मन में विश्वास पैदा करना होगा कि किसी भी क्षेत्र से किसी भी जाति, धर्म या समाज के व्यक्ति को रोजगार के अभाव में एक क्षेत्र से दुसरे क्षेत्र में पलायन नहीं करना पड़ेगा और न ही किसी के शोषण से किसी को शोषित होना पड़ेगा।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूर्व से पश्चिम तक
नवनीत रोजगारोन्मुखी व्यवसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों के बीच सामंजस्य स्थापित करना चाहिए।
सर्वव्यापी शहरीकरण के साथ ही साथ ग्रामीण क्षेत्रों में नव तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा एवं औद्योगिक विकासोन्मुख योजनाओं को क्रियान्वित करना चाहिए, और ढांचागत नीतिगत सिद्धांतों में आवश्यकतानुसार फाईनेंशियल व रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण में सफलतम बदलाव करके योग्यतानुसार प्राथमिकताओं को प्रदान करना चाहिए।

मुफ्तखोरी, सब्सिडी जैसी भ्रष्टाचार रुपी बिचौलियों से ओतप्रोत योजनाओं को समाप्त करके शुद्ध पुरुषार्थी को समर्पित समृद्धशाली योजनाओं को क्रियान्वित करें और संबंधित विभागों में न्यूनतम पेपर फाइल प्रणाली को सम्पादित करना चाहिए ।
देश व विदेश नीति एवं टेक्स प्रणाली का सरलीकरण करना चाहिए, ताकि देश का किसान हो या सामान्य उधोगपति वो अपनी सूझ-बूझ व ईमानदारी से सरकारी टेक्स आदि का लेन-देन स्वयं कर सकें और अपने खेत या इंडस्ट्रीज के प्रोडक्ट्स को स्वतंत्र रूप से किसी भी राज्य या देश में खरीद बिक्री करके अपने पुरुषार्थ का उचित मूल्य प्राप्त कर सकें।
ऐसे दुर दृष्टिगत समृद्धवान योजनाओं को लागू करने के निर्णयों के पश्चात् किसी भारतीय वोटर को लुभावने की कवायद साकार नहीं होगी, क्योंकि ऐसी संरचनाओं से वोटरों को अपना भविष्य निहीत सुरक्षित दिखाई देगा!
आज महामारी काल में इंसानियत को शर्मशार करने वाली ओछी राजनीति व ओछी मानसिकता के फलस्वरूप दंश झेल रहा मानव, संसाधनों के अभाव में दिन-रात अपर्याप्त कष्टों से जुझने को मजबुर हैं।
आज तक ऐसी दयनीय स्थिति से निजात दिलाने में असफलताओं के कारण राजनीति में ” वोट-बैंक ” का प्रभाव बढ़ता जा रहा हैं। जिसका खामियाजा बार-बार आमजन को भुगतना पड़ता हैं। ऐसी गरीब अमीर के बीच की विघटनकारी परिस्थितियों में बदलाव करना चाहिए।

हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी निर्णायक क्षमताओं के धनी हैं,भारत के गौरव हैं,विश्व आपके मार्गदर्शन को लालायित हैं, भारत की संस्कृति, कौशलता, मानवीय सेवाओं एवं विश्वशनीयता की छाप को बरकरार रखते हुए आज विशालकाय औद्योगिकीकरण कल्पनाओं को साकार करने में प्रयत्नशील हैं।
आपका “आत्मनिर्भर भारत”का अतुल्नीय सोपान हैं,”मेक इन इंडिया”के तहत् निर्माण क्षेत्र में गतिशील हैं,
आंख दिखाने वालों की आंख में आंख डालकर बात करने की क्षमता व गोली के बदले गोला देने की क्षमता का परिचायक बना चुके महाशक्तिशाली नव भारत के नवनिर्माण का खाका आपके कम्प्यूटराईज्ड दिमाग में खींचा हुआ तैयार हैं, पिटारा खोलने की बस अपेक्षा हैं अनुकूल वातावरण की! बसंत के बहार की!बस अपेक्षा हैं एक साधक को ऋषि-मुनियों के आशीर्वाद की।
ऐसी अनुकरणीय उर्वरा भूमि के शुशान्त विकासोन्मुख भारतीय धरा पर दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनिया आने को लालायित बनें, ऊर्जावान शक्तियों का आवागमन हमारे युवाओं के उज्जवल भविष्य में महासुखदाई का आधार बनें और युगान्तर में कर्तव्यनिष्ठ धर्मराज सम्राट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का सोपान साकार बनें।

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