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सरकार का तबादलों का व्यापार बेपर्दा

– हेम शर्मा –

मुख्यमंत्री जी हर सत्तारूढ़ राजनीतिक दल और सरकारें तबादलों का व्यवसाय ही तो करती हैं। बड़े से लेकर निचले स्तर के अधिकारी किसके चहेते होते हैं। इनकी नियुक्तियां ब्यूरोक्रेटिक सिस्टम से कभी नहीं होती। सीनियर के ऊपर जूनियर को क्यों लगा दिया जाता है ? यह दरअसल शिक्षकों का सिफारिश से या पैसे देकर तबादला करने जैसा ही है। जिलों में प्रमुख पदों पर मुख्य अधिकारी मंत्रियों और सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों की अनुशंसा पर ही आप क्यों लगाते हैं। भोले भले शिक्षकों ने सार्वजनिक रूप से इस सच को आपके पूछने पर उजागर कर दिया। आप से अगर पूछा जाए कि सचिवालय में ब्यूरोक्रेसी की तैनाती क्या शिक्षकों के तबादलों में पैसे देने के खेल से कम है ? मुख्य सचिव का तो खैर मुद्दा ही अलग है।पुलिस के अफसर हो या अन्य अधिकारी जिनकी नियुक्ति नेताओं की अनुशंसाओं से की जाती हैं। फिर ये नेता अपनी राजनीतिक साख या चहेतो के लिएं इन अधिकारियों का जमकर उपयोग करते हैं। कोन से थाने में कोन थानेदार लगेगा यह इलाके का सत्तारूढ़ पार्टी का विधायक निश्चित करता है। यह बात सही है क्या मुख्यमंत्री जी । अगर सही है तो शिक्षकों के पैसे लेकर तबादला करने जितना ही गंभीर मामला है। आप तो सच को जानते ही हो। आपसे क्या छिपा हुआ है। हर सरकार ऐसा ही करती है। चाहे किसी की भी सरकार हो कुछ शिक्षक मजबूरी में पैसे देकर ट्रांसफर करवाते ही है। पता नहीं मुख्यमंत्री जी ने जानते बूझते इस सच से पर्दा क्यों उठाया। शिक्षकों से एक पर्दा हटाते ही व्यवस्था स्वत बेपर्दा हो गई। अब मुख्यमंत्री के लिए इन व्यवस्थागत खामियों पर फिर से पर्दा डालना मुश्किल हो जाएगा।

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