दस वर्ष बाद फिर से आई वो शुभ घड़ी
संवत आठे दोय हजारा, आसो तेरस शुक्रवारा।
शुभ मूर्हूत वर सिंह लग्न में, पूरण किनो बैठ मग्न मे।
26 सितम्बर, बाड़मेर। शहर के श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ आराधना भवन में चातुर्मासिक आराधना के अंतर्गत परम पूज्य गणाधीश पन्यास प्रवर विनयकुशल मुनिजी म.सा. की निश्रा हर दिन सुबह प्रवचन, जप-तप का कार्यक्रम धूमधाम से चल रहा है।
अनुष्ठान में भाग लेने वाले आराधक अपने साथ में 36 मिश्री, 36 लोंग, 36 इलायची लेकर गये। आज तक हम उसी दादा गुरूदेव इकतीसा पाठ को हमेशा करते है। ओर दादा गुरूदेव हमें आज भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चमत्कार देखने को मिलता है। इस आने वाली आसोज वदी 13 शुक्रवार को सिंह लग्न भी है यह एक साथ वर्षों बाद एक साथ आता है इस आने वाली 27 सितम्बर शुक्रवार को यह शुभ दिन है जिस दिन पूर्व में छड़ीदार गोपालजी ने गुरू इकतीसा लिखकर भट्टारक यतिवर्य आचार्य श्री विजयेन्द्रसूरीजी म.सा. को अर्पित किया जो शुक्रवार सिंह लग्न में संघ के बीच में सभी के सामने बोला गया, जो आज सभी जगह श्रद्धा से पढ़ा जाता है।
ऐसा अवसर 2009 में आया था। उसके बाद इस 27 तारीख को वो शुभ दिन है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय खरतरगच्छ महासंघ युवा शाखा बाड़मेर, जिनकुशल भक्ति मंडल, खरतरगच्छ युवा परिषद, जिनशासन युवति मंच अपनी सेवाएं है।