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सावन मास की महिमा और हर छोटी-बड़ी जानकारी

पं. रविन्द्र शास्त्री – 7701803003

आषाढ़ महीने की शुरुआत होते ही महादेव के भक्तों के अंदर उत्साह फूट पड़ता है क्योंकि इस महीने के बाद ही सावन का पवित्र महीना प्रारम्भ होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन हिन्दू वर्ष का पांचवा महीना है। यह महीना विशेष तौर से भगवान शिव को समर्पित होता है।

सावन का पवित्र महीना कब से शुरू हो रहा है, क्या है इसका महत्व और सभी सोमवार व्रत की तिथियां क्या हैं। इसके अलावा हम आपको इस लेख में सावन में होने वाले सभी ग्रह के गोचर और उनका देश पर क्या प्रभाव पड़ने की संभावना है, इस बात की भी जानकारी देने वाले हैं।

आइये सबसे पहले सावन का महत्व आपको बता देते हैं।

सावन का महीना शिव भक्तों के लिए विशेष है क्योंकि यह महीना भगवान शिव को भी बेहद प्रिय है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सावन के महीने में माता पार्वती ने निराहार रहकर भगवान शिव को पति रूप में पाने का कठोर व्रत किया था। यह भी एक वजह है कि भगवान शिव को सावन का महीना बेहद प्रिय है। इस महीने देश भर में सनातन धर्म के अनुयायी भगवान शिव के प्रमुख मंदिरों में जल अर्पित करते हैं। सावन में पड़ने वाले सोमवार में रुद्राभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
यह पूरा महीना ही भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों की सारी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते हैं। महिलाएं इस दौरान अपने पति के लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
इस पूरे महीने कांवड़िए काँवड़ लेकर चलते हैं और भगवान शिव पर गंगाजल अर्पित करते हैं। पूरे देश की सड़कें इस महीने भगवा रंग से सराबोर हो जाती हैं। हालाँकि इस वर्ष क्योंकि देश पहले से ही एक गंभीर वैश्विक महामारी से ग्रस्त है, ऐसे में भीड़भाड़ में इस बीमारी में बढ़ने की आशंका के चलते कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी गयी है।

कांवड़ यात्रा से जुड़ी पौराणिक कथा
बहुत कम ही लोग जानते हैं कि हर वर्ष भव्य पैमाने पर निकलने वाली इस कांवड़ यात्रा से जुड़ी भी एक बेहद प्रचलित कथा है, जिसके अनुसार बताया जाता है कि, जब देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हो रहा था तब, इस मंथन से चौदह रत्न प्राप्त हुए थे। लेकिन इन्हीं चौदह रत्नों में से एक था हलाहल विष।
कहा जाता है कि यह विष इतना जहरीला था कि इस से पूरी सृष्टि को खतरा था। ऐसे में सृष्टि को इस विष के प्रकोप से बचाने के लिए भगवान शिव ने इस विष को पी लिया। हालाँकि उन्होंने इस विष को अपने गले से नीचे नहीं जाने दिया।
विष इतना जहरीला था कि इससे भगवान शिव का कंठ ही नीला पड़ गया। इसी वजह से भगवान शिव का एक नाम नीलकंठ भी पड़ गया। तब भगवान महादेव का परम भक्त रावण, काँवर में गंगाजल लेकर आया और उसी जल से उसनें शिवलिंग का अभिषेक किया। जिसके बाद ही भोलेनाथ को इस विष से मुक्ति मिली। तभी से कांवरिये मीलों पैदल चलकर गंगाजल लाते हैं और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं।

– सावन के सोमवार की तिथि

सावन का महीना इस साल यानी कि साल 2021 में 25 जुलाई से शुरू हो रहा है और 22 अगस्त को इस पवित्र महीने का समापन होगा। इस दौरान कुल चार सोमवार पड़ेंगे।

पहला सोमवार व्रत
26 जुलाई, 2021

दूसरा सोमवार व्रत
02 अगस्त, 2021

तीसरा सोमवार व्रत
09 अगस्त, 2021

चौथा सोमवार व्रत
16 अगस्त, 2021

सावन महीने में भगवान शिव की पूजा करने की विधि क्या है।

सावन के महीने में सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करके साफ व सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव को शुद्ध जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से स्नान कराएं। भगवान को स्नान करवाते वक्त मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि अर्पित करें। शिव चालीसा का पाठ करें और शिव आरती करें। महिलाएं इस दिन माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। इससे उनके पति की आयु लंबी होगी और घर में सौभाग्य की वृद्धि होगी।

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