– शाहजहाँपुर-खेड़ा बॉर्डर पर 16 मई रविवार को 154 वें दिन भी जारी रहा आंदोलन।
गुरुग्राम, हरियाणा।(दिनेश शर्मा “अधिकारी”)। हरियाणा के हिसार में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दौरे का विरोध करने पहुंचे किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। संयुक्त किसान मोर्चा ने समूह चर्चा में कड़ी शब्दों में निंदा की।
डॉ.संजय “माधव” ने बताया कि रविवार को हरियाणा के हिसार में सीएम खट्टर के प्रोग्राम का जोरदार विरोध करते हुए हजारों की संख्या में किसानों ने खट्टर को घेर लिया। पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे, इसमें कई किसानों को गंभीर चोटें लगी हैं । संयुक्त किसान मोर्चा पुलिस की इस बर्बरता पूर्ण कार्यवाही की कड़े शब्दों में निंदा करता है। हिसार में हुए किसानों पर लाठीचार्ज के बाद रामायण मायड़ टोल पर संयुक्त किसान मोर्चा की कमेटी की मीटिंग हुई। मीटिंग में कई अहम फैसलों और आगामी रणनीति पर चर्चा की गई।
शाहजहाँपुर-खेड़ा बॉर्डर पर समूह चर्चा करते हुए किसानों ने कहा कि कोरोना महामारी के बावजूद किसानों का आंदोलन जारी है। किसान अभी भी दिल्ली के चारों ओर सीमाओं पर अपनी फसलों और नस्लों को बचाने के लिए डटे हुए हैं। किसान-संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बीते चार महीने से कोई बातचीत नहीं हुई है। हम इस अंधी-बहरी-गूंगी सरकार को चेतावनी देते है कि वो किसानों पर दमन बंद करते हुये किसानों की मांगों को तुरंत मान ले वर्ना इसके बहुत ही गंभीर परिणाम भाजपा-आरएसएस और उनकी सरकारों को भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। किसानों के ये मोर्चे अब हमारे गांव, घर और कॉलोनी बन गए हैं और ये अब ऐसे ही नहीं हटेंगे। गांव और शहरों की तुलना में किसान आंदोलन में जनसंख्या का घनत्व कम है। इसलिए यहां पर कोरोना संक्रमण होने का ज्यादा खतरा नहीं है। इसलिए सरकार कोरोना का बहाना देकर हमें नहीं हटा सकती है। यहां हम 6 महीने से रह रहे हैं। यहां अब गांव और पक्की कॉलोनियां बन चुकी है। अब ये सिर्फ बातचीत से मांगे पूरी करने के बाद ही हट सकती है। अगर कोरोना काल में बिल और कानून आ सकता है तो अबकी बार दुबारा भी लाया जा सकता है। किसानों ने मौत की परवाह करना छोड़ दिया है, मौत तो एक दिन सभी की होगी..आंदोलन लड़ कर जीत लेंगे, खेती किसानी बच गयी तो फिर सिर्फ कोरोना से जंग रहेगी,जीत लेंगे लेकिन… अगर यहां से यूँ ही चले गए तो गांव में देशी-विदेशी पूंजीपतियों के साथ मिलकर सरकार भी मारेगी और कोरोना भी मारेगा। यहां तो सिर्फ एक ही तरह से मरेंगे फिर रोज तिल तिल कर मरना होगा। अत: जब तक सरकार किसानों की सभी मांगे नही मानेगी तब तक यह आंदोलन ख़त्म नहीं होगा।