मुंबई, 21 मई 2026: भारत के बहुआयामी कारोबारी समूहों में शुमार एस्सेल ग्रुप ने अपनी वैश्विक यात्रा के 100 स्वर्णिम वर्ष पूरे कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 1926 में आदमपुर जैसे छोटे से शहर से शुरू हुई यह यात्रा आज दुनिया भर में विविध कारोबारों में अपनी मजबूत पहचान रखने वाले विशाल समूह के रूप में स्थापित हो चुकी है। बीती एक सदी में एस्सेल ग्रुप ने अपने नवाचार, दूरदृष्टि और उद्यमशीलता की भावना से वैश्विक स्तर पर एक स्थायी छाप छोड़ी है।
1967 के बाद एस्सेल ग्रुप ने पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़ते हुए खुद को स्टार्ट-अप संस्कृति वाले वैश्विक समूह के रूप में स्थापित किया। कमोडिटी ट्रेडिंग से शुरू हुआ कारोबार आगे चलकर आर्मी सप्लाई और सीमापार व्यापार तक पहुंचा। इसके बाद समूह ने ऐसे कई क्षेत्रों में कदम रखा, जहां उसने उद्योग जगत में पहली बार नई पहल करते हुए नए मानक स्थापित किए। स्टार्ट-अप सोच और लाभप्रदता पर स्पष्ट फोकस बनाए रखते हुए समूह ने उन व्यवसायों को बंद करने से भी परहेज नहीं किया, जो अपेक्षित स्तर पर मूल्य सृजन नहीं कर पा रहे थे।
स्वर्गीय राम गोपाल जी द्वारा स्थापित इस समूह को उनके पुत्र श्री जगन्नाथ जी गोयनका ने आगे बढ़ाया। श्री नंद किशोर जी के सहयोग और बाद में दूरदर्शी उद्योगपति डॉ. सुभाष चंद्र एवं उनके भाइयों – लक्ष्मी नारायण, जवाहर और अशोक गोयल – के नेतृत्व में एस्सेल ग्रुप नई ऊंचाइयों तक पहुंचा। आज यह देश के चुनिंदा कारोबारी समूहों में शामिल है, जिसकी समृद्ध विरासत सफलतापूर्वक छठी पीढ़ी तक पहुंच रही है, जबकि चौथी और पांचवीं पीढ़ी अब भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
पिछले 100 वर्षों में समूह ने पैकेजिंग, होम एंटरटेनमेंट, एम्यूजमेंट पार्क, न्यूज, कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, शिक्षा, टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल जैसे अनेक क्षेत्रों में विस्तार किया। इसके माध्यम से 190 से अधिक देशों में अरबों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। उदारीकरण से पहले के दौर में भारतीय उद्योग जगत को नई पहचान देने से लेकर देश की आर्थिक ताकत और सांस्कृतिक प्रभाव को मजबूत करने तक, एस्सेल ग्रुप ने राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई। अपनी अग्रणी पहलों के जरिये समूह ने सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि पूरे उद्योग खड़े किए और ‘इम्प्रेशन ऑफ ए सेंचुरी’ की अवधारणा को साकार करते हुए देशभर में 1 करोड़ से अधिक रोजगार अवसर सृजित किए।
इस ऐतिहासिक अवसर पर डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा, “एस्सेल ग्रुप की यात्रा दृढ़ संकल्प, संघर्ष, नवाचार और विकास की कहानी रही है। हमारा हमेशा यह विश्वास रहा कि प्रगति वही है, जो समाज और राष्ट्र दोनों के लिए मूल्य पैदा करे। इसी सोच ने समूह को हर कारोबारी क्षेत्र में अग्रणी कदम उठाने की प्रेरणा दी। मैं और मेरे भाई इस बात पर गर्व महसूस करते हैं कि पीढ़ियों की दूरदृष्टि और नए रास्तों पर चलने के साहस ने एस्सेल ग्रुप को 100 वर्षों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि तक पहुंचाया। हमारी यात्रा देश की प्रगति के साथ-साथ आगे बढ़ी है और हमें गर्व है कि हमने आर्थिक मूल्य सृजन के साथ सामाजिक बदलाव को भी गति दी है।”
इस विशेष अवसर पर डॉ. चंद्र ने दुनिया भर में मौजूद एस्सेल ग्रुप के 10,000 से अधिक कर्मचारियों को संबोधित किया। आयोजित विशेष टाउनहॉल में उन्होंने समूह की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए कर्मचारियों की भूमिका को सराहा, जिन्होंने इस विरासत को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने समूह की उन पहलों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने दुनिया भर में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया। इस दौरान कई ऐसे प्रेरणादायक अनुभव भी साझा किए गए, जिनमें दशकों से समूह से जुड़े कर्मचारियों की भावनात्मक कहानियां शामिल थीं। डॉ. चंद्र ने दोहराया कि भारत के पहले स्टार्ट-अप के रूप में एस्सेल ग्रुप भविष्य के लिए लगातार नए कदम उठा रहा है और कर्मचारियों से भी उद्यमशीलता की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
पिछले 100 वर्षों में एस्सेल ग्रुप ने भारत की आर्थिक और सामाजिक संरचना पर गहरी छाप छोड़ी है।
राष्ट्र निर्माण में समूह की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
भारत में आधुनिक पैकेजिंग तकनीक की शुरुआत
एस्सेल ग्रुप ने एस्सेल प्रोपैक के माध्यम से भारत में आधुनिक उपभोक्ता पैकेजिंग तकनीक को नई पहचान दी। कंपनी ने लैमिनेटेड प्लास्टिक ट्यूब तकनीक की शुरुआत की और दुनिया की सबसे बड़ी लैमिनेटेड ट्यूब निर्माता कंपनी बनी। पांचों महाद्वीपों में प्लांट स्थापित कर यह भारत की पहली बहुराष्ट्रीय कंपनियों में शामिल हुई। एक समय ऐसा था जब दुनिया की एक-तिहाई आबादी दांत साफ करते समय इसी कंपनी द्वारा निर्मित ट्यूब का इस्तेमाल करती थी।
साझा मनोरंजन अनुभवों को नई पहचान
लोगों को एक साथ जोड़ने वाले मनोरंजन की बढ़ती जरूरत को पहचानते हुए समूह ने एशिया के सबसे बड़े एम्यूजमेंट पार्क ‘एस्सेल वर्ल्ड’ की शुरुआत की। इस पहल ने एशिया में मनोरंजन और पर्यटन उद्योग को नई दिशा दी और देश के पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी तथा इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मजबूत आर्थिक आधार प्रदान किया।
भारत के छोटे मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र को विशाल उद्योग में बदलना
एस्सेल ग्रुप ने 1992 में देश का पहला निजी सैटेलाइट टीवी चैनल ‘ज़ी टीवी’ और 1995 में पहला निजी समाचार चैनल ‘ज़ी न्यूज़’ शुरू कर भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाया। इससे सूचना और मनोरंजन तक आम लोगों की पहुंच आसान हुई और भारतीय संस्कृति व मूल्यों से जुड़ा कंटेंट दुनिया भर तक पहुंचा। कंटेंट क्रिएशन, विज्ञापन, वितरण, प्रोडक्शन और डिजिटल उपभोग के नए अवसरों ने इस उद्योग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
इसके बाद समूह ने सिटी केबल और डिश टीवी के जरिये कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र में भी बड़ा निवेश किया, जिसने घर-घर तक मनोरंजन पहुंचाने के तौर-तरीकों को बदल दिया। आज भारतीय मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग उभरते बाजारों में सबसे आकर्षक निवेश क्षेत्रों में गिना जाता है और बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आकर्षित कर रहा है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के जरिये नई पीढ़ी को सशक्त बनाना
शिक्षा को देश के भविष्य की सबसे मजबूत नींव मानते हुए समूह ने ज़ी लर्न के माध्यम से अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई। आज समूह के 2500 से अधिक ‘किड्ज़ी’ प्री-स्कूल एशिया की सबसे बड़ी प्री-स्कूल श्रृंखलाओं में शामिल हैं, जो लाखों बच्चों के जीवन को आकार दे रहे हैं। इसके अलावा के-12 स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थान युवाओं की प्रतिभा को निखारने का कार्य कर रहे हैं।
आधुनिक नागरिक बुनियादी ढांचे का निर्माण
एस्सेल ग्रुप के इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार ने देश में महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं के विकास में अहम भूमिका निभाई। राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर शहरी जल प्रबंधन और बिजली वितरण नेटवर्क तक, समूह ने कई राज्यों में बेहतर कनेक्टिविटी और जीवन स्तर सुधारने में योगदान दिया।
देश की अगली विकास यात्रा को वित्तीय सहयोग
एस्सेल फाइनेंस के माध्यम से समूह ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराईं और सुरक्षित ऋण एवं क्रेडिट सुविधाओं के जरिये उद्योगों के विकास को गति दी। समूह के लिए सफलता केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रही, बल्कि नए उद्योगों और अवसरों का निर्माण करना भी उसका लक्ष्य रहा।
समाज के प्रति जिम्मेदारी
व्यापार से आगे बढ़कर एस्सेल ग्रुप ने सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। एकल विद्यालय, ग्लोबल विपश्यना फाउंडेशन और सुभाष चंद्र फाउंडेशन के माध्यम से समूह ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में लगातार काम किया है। सुभाष चंद्र फाउंडेशन आज देश के सैकड़ों गांवों में ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को सशक्त बना रहा है।
भविष्य में भी समूह कई नई सामाजिक पहलों पर काम करेगा, जिनमें भारत के युवाओं के लिए ‘सुभाष चंद्र मोटिवेशनल शो’ जैसी पहलें शामिल हैं।
एस्सेल ग्रुप के अगले 100 वर्ष
भारत के अपने स्टार्ट-अप के रूप में एस्सेल ग्रुप आज भी अपनी उद्यमशीलता की भावना को आगे बढ़ाते हुए नए कारोबारी क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है। आने वाले समय में टेक्नोलॉजी, डिजिटल और कंटेंट इकोसिस्टम समूह के प्रमुख फोकस क्षेत्र होंगे। समूह भविष्य के लिए एकीकृत और आधुनिक प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है, जो लोगों की भागीदारी को दीर्घकालिक मूल्य में बदल सकें और तेजी से बढ़ती ‘अटेंशन इकॉनमी’ में मजबूत हिस्सेदारी हासिल कर सकें।
भविष्य के लिए समूह की रणनीति भारत की विकास आकांक्षाओं के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और ऐसे अवसर तैयार करना है, जो वैश्विक मंच पर भारत के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास की अगली कहानी लिखें।

