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स्टीमहाउस इंडिया लिमिटेड का आईपीओ बुधवार, 9 सितंबर 2026 को खुलेगा

स्टीमहाउस इंडिया लिमिटेड अपने 2 रुपये अंकित मूल्य वाले इक्विटी शेयरों की आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) 9 सितंबर 2026, बुधवार को खोलने जा रही है। एंकर निवेशकों के लिए बोली 8 सितंबर 2026, मंगलवार को खुलेगी, जो आईपीओ खुलने की तारीख से एक कार्य दिवस पहले है। बोली/ऑफर 11 सितंबर 2026, शुक्रवार को बंद होगा।

आईपीओ का मूल्य दायरा 77 रुपये से 81 रुपये प्रति इक्विटी शेयर तय किया गया है। निवेशक न्यूनतम 185 इक्विटी शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं और इसके बाद 185 शेयरों के गुणकों में बोली लगाई जा सकेगी।

कुल 414 करोड़ रुपये के इस आईपीओ में 353 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी करना (फ्रेश इश्यू) और 61 करोड़ रुपये तक का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल है। ओएफएस के तहत बिक्री करने वाला शेयरधारक अपने शेयर बेचेगा।

कंपनी आईपीओ से प्राप्त शुद्ध राशि का इस्तेमाल कई उद्देश्यों के लिए करेगी। इसमें कंपनी द्वारा लिए गए कुछ बकाया कर्जों के पुनर्भुगतान या समय से पहले भुगतान के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूंजीगत खर्च शामिल है। इसमें अंकलेश्वर संयंत्र के फेज-3 और पनोली संयंत्र के फेज-2 का क्षमता विस्तार भी शामिल है। इसके अलावा, कंपनी दहेज जीआईडीसी में स्टीम उत्पादन के लिए नई विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के फेज-2 पर पूंजीगत खर्च करेगी। शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

स्टीमहाउस इंडिया लिमिटेड एक भारतीय कंपनी है, जो अपने पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से औद्योगिक गैसों, खासकर स्टीम और नाइट्रोजन, के उत्पादन और केंद्रीकृत वितरण का कारोबार करती है। कंपनी और उसके प्रमोटर भारत में कम्युनिटी बॉयलर सिस्टम के अग्रदूत हैं। इसे पहली बार वर्ष 2014 में पेश किया गया था। कंपनी की सामुदायिक औद्योगिक गैस उत्पादन एवं वितरण प्रणाली पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न औद्योगिक ग्राहकों तक गैस पहुंचाती है। इससे प्रत्येक ग्राहक को अपने स्तर पर अलग गैस उत्पादन एवं वितरण बुनियादी ढांचा स्थापित करने की जरूरत नहीं पड़ती।

स्टीमहाउस के औद्योगिक गैस कारोबार में स्टीम का उत्पादन एवं वितरण, स्टीम की खरीद एवं वितरण तथा नाइट्रोजन का पृथक्करण, संपीड़न एवं वितरण शामिल है। कंपनी ने फरवरी 2025 में अपने अंकलेश्वर संयंत्र में वितरित पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से नाइट्रोजन की आपूर्ति के लिए अपनी पहली सुविधा शुरू की थी।

यह आईपीओ एससीआरआर के नियम 19(2)(बी) और सेबी आईसीडीआर विनियमों के विनियम 31 के तहत पेश किया जा रहा है। ऑफर बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। सेबी आईसीडीआर विनियमों के अनुसार, आईपीओ के 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से को योग्य संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबीs) के लिए आनुपातिक आधार पर आवंटन हेतु उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। कंपनी, बुक रनिंग लीड मैनेजर (बीआरएलएम) के साथ परामर्श के बाद, क्यूआईबी हिस्से के अधिकतम 60 प्रतिशत तक हिस्से को एंकर निवेशकों को विवेकाधीन आधार पर आवंटित कर सकती है। एंकर निवेशक हिस्से में से 33.33 प्रतिशत घरेलू म्यूचुअल फंडों और 6.67 प्रतिशत जीवन बीमा कंपनियों तथा पेंशन फंडों के लिए आरक्षित रहेगा। यह आवंटन संबंधित संस्थाओं से एंकर निवेशक आवंटन मूल्य या उससे अधिक पर वैध बोलियां प्राप्त होने के अधीन होगा। यदि एंकर निवेशक हिस्से में शेयरों की मांग कम रहती है या किसी शेयर का आवंटन नहीं होता है, तो बचे हुए शेयरों को नेट क्यूआईबी हिस्से में जोड़ दिया जाएगा। नेट क्यूआईबी हिस्से का 5 प्रतिशत हिस्सा केवल म्यूचुअल फंडों को आनुपातिक आधार पर आवंटन के लिए उपलब्ध होगा। शेष हिस्सा सभी क्यूआईबी बोलीदाताओं, एंकर निवेशकों को छोड़कर, जिसमें म्यूचुअल फंड भी शामिल हैं, को आनुपातिक आधार पर आवंटित किया जाएगा। यदि म्यूचुअल फंडों की कुल मांग नेट क्यूआईबी हिस्से के 5 प्रतिशत से कम रहती है, तो म्यूचुअल फंड हिस्से में बचे शेयरों को शेष क्यूआईबी हिस्से में जोड़ दिया जाएगा। आईपीओ का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा गैर-संस्थागत बोलीदाताओं (एनआईबी) के लिए उपलब्ध होगा। इस हिस्से में एक-तिहाई हिस्सा 2 लाख रुपये से अधिक और 10 लाख रुपये तक के आवेदन आकार वाले निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। दो-तिहाई हिस्सा 10 लाख रुपये से अधिक के आवेदन आकार वाले निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। यदि इनमें से किसी श्रेणी में शेयरों की मांग पूरी नहीं होती है, तो बचे हुए शेयर दूसरी श्रेणी के गैर-संस्थागत निवेशकों को आवंटित किए जा सकते हैं।

आईपीओ का कम से कम 35 प्रतिशत हिस्सा खुदरा व्यक्तिगत बोलीदाताओं (आरआईबी) के लिए उपलब्ध होगा। यह आवंटन सेबी आईसीडीआर नियमों के अनुसार किया जाएगा और इसके लिए ऑफर मूल्य या उससे अधिक पर वैध बोलियां प्राप्त होना आवश्यक होगा।

एंकर निवेशकों को छोड़कर सभी निवेशकों के लिए आईपीओ में एएसबीए (एप्लीकेशन सपोर्टेड ब्लॉक्ड अमाउंट) प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य होगा। निवेशकों को अपने बैंक खाते का विवरण देना होगा। यूपीआई के माध्यम से आवेदन करने वाले निवेशकों को अपना यूपीआई आईडी भी देना होगा। संबंधित बोली राशि निवेशक के बैंक खाते में ब्लॉक कर दी जाएगी। हालांकि, एंकर निवेशक एएसबीए प्रक्रिया के जरिए आईपीओ में आवेदन नहीं कर सकेंगे।

स्टीमहाउस इंडिया लिमिटेड के इक्विटी शेयरों को बीएसई लिमिटेड और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसई) पर सूचीबद्ध कराने का प्रस्ताव है। दोनों एक्सचेंजों को सामूहिक रूप से स्टॉक एक्सचेंज कहा जाएगा।

इक्विरस कैपिटल लिमिटेड (पूर्व नाम इक्विरस कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड) इस आईपीओ का एकमात्र बुक रनिंग लीड मैनेजर (बीआरएलएम) है।

इस विज्ञप्ति में जिन बड़े अक्षरों में लिखे शब्दों की अलग से परिभाषा नहीं दी गई है, उनका वही अर्थ होगा जो रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में दिया गया है।

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