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स्वयं के विरुद्ध युद्ध करना सीखें


हर व्यक्ति में बहुत सारी अच्छाई होती है पर कुछ बुराई या यूं कहो कमियां भी रहती है जो उन्हे नहीं दिखती पर यदि उन्हे जानकारी में कोई लाता है या व्यक्ति को स्वयं अनुभव होता है कि वाकई में उसमें कोई कमी या बुराई है तो उसे सुधारने के लिए व्यक्ति को स्वयं से लड़ना , समझाना , झुकना , कंप्रोमाइज करना पड़ेगा, यह सब सीखना होगा और इन सब बात के लिए स्वयं से वैचारिक युद्ध भी करना पड़े तो करना पड़ेगा।
क्रोधित स्वभाव वाले को क्रोध पर नियंत्रण के लिए, लालची को लालच छोड़ने के लिए, स्वार्थी को स्वार्थ त्याग के लिए, तामसी प्रवृत्ति वाले को शांति के लिए स्वयं से लड़कर भी यदि इन आदतो से छुटकारा मिलता है तो उसको लडना सिखना होगा।
शारीरिक कमजोरी है बीमारियां भी हो रही होगी तो उनसे लडने के लिए स्वयं को मानसिक तौर पर तैयार करना होगा, बीमारी एक तरह से जैसे घर में चोर घुस जाता है या तो डर जाओ या उसे भगाओ। बीमार आदमी ने फौजी प्रवृत्ति का होना चाहिए बीमारी शरीर की दुश्मन है उससे भगाना है या मारना है।
पढ़ाई या कामकाज में भी मन नहीं लगता है परन्तु जीवन जिने के लिए दोनों जरूरी है अत: मन से लड़कर आलस्य को छोडना होगा ताकि पढ़ाई और कामकाज में मन लगे।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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