

-सीवीएम विश्वविद्यालय, विज्ञान गुर्जरी और एनवीपास गुजरात कॉलेज द्वारा आयोजित वेबिनार में “चेंज एण्ड रेजिलिएंस” विषय पर डॉ. गौरव बिस्सा का बतौर मुख्य वक्ता संबोधन
बीकानेर। (ओम एक्सप्रेस )स्वयं पर विश्वास रखना और “आई कैन” का भाव व्यक्ति में जोश भरता है. यदि कुछ कर गुज़रना चाहते हैं तो जीवटता से, जुनून से जमे रहिये. प्रयास की कमी ही भय का माहौल बनाती है. ये विचार अभियांत्रिकी महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. गौरव बिस्सा ने वल्लभ विद्यानगर गुजरात के सीवीएम विश्वविद्यालय, विज्ञान गुर्जरी और एनवीपास कॉलेज द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कैपेसिटी डेवलपमेंट वेबिनार में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किये. विश्वविद्यालय द्वारा “बी अ विनर – चेंज एण्ड रेसिलियेंस” विषय पर आयोजित इस वेबिनार में डॉ बिस्सा ने कहा कि हमारा मस्तिष्क कई सुपर कम्प्यूटर्स से भी ज़्यादा तेज़ और बेहतर है क्योंकि वो 30 लाख बिट्स की सूचना एक सेकंड में याद रख लेता है और हम उस मस्तिष्क में कुत्सित और घृणित विचार भर देते हैं. ऐसे में समाज में चेंज कैसे आयेगा? उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन हेतु हमें “रूट कॉज़ एनेलिसिस” करना होगा जिससे आप अदृश्य छिपी वास्तविक समस्या को पहचान सकें और उसका समाधान खोज सकें।


डॉ बिस्सा ने कहा कि स्वयं को कमज़ोर समझना, स्वयं की शारीरिक या मानसिक दुर्बलता के विषय में सोचते रहना आत्मसम्मान की कमी का प्रतीक है. डॉ बिस्सा ने अवसरों का लाभ उठाने की प्रवृत्ति की समझाते हुए कहा कि ज़िन्दगी अवसरों से भरी हुई है अतः आज का काम कल पर छोड़ने की प्रवृत्ति को त्यागते हुए प्रत्येक अवसर का लाभ उठाना चाहिये।
डॉ. बिस्सा ने द इकनोमिस्ट के रेफरेंस से बताया कि कोरोना के कारण यूरोपीय देशों में सैर, मनोरंजन, ट्रेवल आदि क्षेत्रों में खर्च अस्सी फीसदी कम होने, भारत में अकस्मात मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ने और बच्चों के मोबाइल स्क्रीन पर बिताये जाने वाले समय की बढ़ोतरी अत्यंत चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि इस चिंता के काल में भी हमें अपने राष्ट्र पर गर्व होना चाहिये क्योंकि आईआईटी दिल्ली ने ऐसे संकट काल में सस्ती टेस्टिंग किट बनाई, आईआईटी चेन्नई ने कपड़ों पर कोरोना को नष्ट करने वाली कोटिंग तथा आईआईटी कानपुर ने कोरोना डिसइन्फेक्टेंट बॉक्स बनाया है. उन्होंने कहा कि पोज़िटिव सोच के साथ ही पोज़िटिव विजुअलाइजेशन करना भी महत्त्वपूर्ण है. डॉ. बिस्सा ने ऋतिक रोशन, जेसिका कोक्स, ब्रीचर आदि के रोचक उदाहरण भी प्रस्तुत किये।


इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अमित बल्लानी ने कन्सन्ट्रेशन की शक्ति को समझाते हुए कहा कि जब एक दिशा में, पूर्ण समर्पण के साथ मेहनत की जाये तो परिणाम उत्कृष्ट ही होंगे. विज्ञान गुर्जरी की ओर से डॉ. कुंदन मिश्रा ने स्वागत उद्बोधन दिया. कुवैत में कार्यरत वरिष्ठ प्रबंधक गगनदीप मिश्रा ने आभार जताया।
