– कुशल प्रशासन का आधार स्वयं पर नियंत्रण

सिमराही बाजार (सुपौल) बिहार
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सिमराही बाजार के तत्वधान में स्थानीय सेवा केंद्र पर ब्रह्माकुमारी संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी की 13 वी पुण्य स्मृति दिवस के उपलक्ष में कोविड-19 अर्थात लॉकडाउन के कारण अपने ही ब्राह्मण कुलभूषणओं के बीच दादी जी के तस्बीर पर डॉक्टर पूनम सिंह, समाजसेवी एवं अमीन देवराम पांडे ,व्यवसायक विनोद यादव ,डॉक्टर के .के. सिंह, नरेश यादव ,बीके बबीता दीदी ,सेंट्रल बैंक मैनेजर सचिन कुमार सिंह ,ब्रह्मा कुमार किशोर भाई जी इत्यादि ने संगठित रूप में माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन करके श्रद्धांजलि अर्पित किया।

कार्यक्रम में सेवा केंद्र की संचालिका राजयोगिनी आदरणीय बबीता दीदी ने प्रकाशमणि दादी जी की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहा कि दादी जी सदा कहती थी अपने को हेड समझेंगे तो हेडेक होती है। इसलिए सदा निमित्त समझकर पर शासन करना चाहिए। दादी जी सदा कहती थी जैसा कर्म हम करेंगे, हमें देख और करेंगे। जीवन में सदा सच्चाई और सफाई रखें ।सदा खुश रहें और दूसरों को भी खुशियां बांटे ,दूसरों के प्रति सदा शुभ भावना और शुभकामना रखें।
दीदी जी ने अपने उद्बोधन में कहीं कुशल प्रशासन वही कर सकता है, जिसका स्वयं पर नियंत्रण हो ।उन्होंने कहा कि जब हम अपने आप को हेड समझते हैं तो है हेडेक पैदा होता है। जब हम अपने लिए केवल निमित्त भाव रखेंगे। तब हम हर कार्य को सबके सहयोग से सुचारू रूप से कर पाएंगे ।दीदी जी ने कहा शासक यदि स्वयं में अध्यात्म को शामिल कर ले तो वह काफी बदलाव ला सकता है।

इसी तरह से सेंट्रल बैंक मैनेजर सचिन कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा भौतिक जगत में रहते हुए भी हम आध्यात्म शुरो को अपना ले, तो हमारा जीवन सफल हो जाएगा। शांति की इच्छा न करें बल्कि इच्छा को ही शांत कर दें तो स्वत् ही शांति आ जाएगी। उन्होंने कहा कि हम दुनियादारी के सरपंच में यह भूल गए हैं कि मानव जीवन का उद्देश्य क्या है। हमने जीवन में क्या खोया और क्या पाया ।इसके बारे में कभी सोचा ही नहीं आज हमें जब इसका महसूस हुई तब पता चला कि मानव जीवन कितना मूल्यवान है ।
डॉक्टर पूनम सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञान शब्दों से नहीं बल्कि आचरण से झलकता है यहां तो ऐसा अनुभव होता है कि जैसा अध्यात्म के सातों सुर एक साथ प्रभावित प्रवाहित हो रही है ।जब हम खुद को आनंदमय शांतिमय ,प्रेममय बना लेंगे तो हम दूसरों को भी स्वत ही सब कुछ दे सकेंगे ।

राजयोगी ब्रह्मा कुमार किशोर भाईजी ने अपने उदबोधन में कहा कि राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि का जैसा नाम था वैसा ही उन्होंने समूचे विश्व में अपनी शक्ति और ज्ञान का प्रकाश फैलाया। उन्होंने नारी शक्ति को एक ऐसा साहस व स्वरूप दिया। जिसके पद चिन्हों पर चलते हुए एक महिला शक्ति का विशाल कारवां बन गया ।दादी जी ने दुनिया को यह बता दिया कि नारी समाज के एक महान क्रांतिकारी नायिका बन सकती है। उन्होंने ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग द्वारा नारी ही शीतला, दुर्गा, सरस्वती और संतुष्टता कि संतोषी देवी बन सकती है। अपने अनुरूप मूल्य निष्ठ जीवन आध्यात्मिक शक्ति एवं प्रशासनिक क्षमता से संस्थान को प्रेम, शांति, सत्यता, समरसता ,सद्भावना ,आत्मिक दृष्टि जैसी जीवन मूल्यों को परमात्मा शिक्षा और विश्वास से सुसज्जित किया। उनके स्मृति दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि।
मौके पर डॉक्टर पूनम सिंह ,अमीन देवराम पांडे ,समाजसेवी विनोद यादव, डॉक्टर के .के .सिंह, नरेश यादव , बीके बबीता दिदि,ब्रह्मा कुमार किशोर भाई जी , दुर्गा वहन, खुशबू बहन ,नीरज भाई , सेंट्रल बैंक मैनेजर सचिन कुमार सिंह, नायक सर ,इंद्रदेव चौधरी, अशोक भाइ, बीरेंद्र भाई, साबित्री देवी ,सुशीला देवी,दुर्गा बहन , जानकी देवी ,सत्यनारायण भाइ इत्यादि प्रभु प्रेमी मौजूद थे।