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हताशा

मानव के स्वभाव भिन्न भिन्न है। कई जीवन में बहुत जल्दी हताश हो जाते हैं और कई अपने मकसद की ओर लगे रहते हैं। हताशा एक तरह से मानो चलती गाड़ी का ब्रेक है। जीवन में जहां आप हताश हुए बस आपके जीवन की रफ्तार वहीं रुक जाएंगी। आदमी ने लगनशील होना चाहिए और अपनी किस्मत पर भरोसा बनाए रखना चाहिए एकदम से हताश होकर अपने काम के अंजाम को नेगेटिव रूख से नही सोचे। हताशा आपके सब्र की परीक्षा है यदि आप थोड़ा संयम और सब्र रखेगे तो निश्चित रूप से आप परीक्षा में उत्तीर्ण होंगे। एकदम से यह न सोचे कि सबकुछ आपके साथ कुछ बुरा होने वाला है या सोचा काम नहीं होगा। जब कोई काम नहीं होता है तो उसके पीछे भी ईश्वर की कोई आपके प्रति अच्छी मंशा होगी इस बात का भरोसा रखें। कई व्यक्ति बिना वजह हताश हो जाते हैं अरे यह काम तो मेरे बस में नहीं है, वह कोशिश ही नहीं करते हैं और उसके पहले ही बता देते हैं कि यह काम मेरे बस का नहीं है। ज्यादा हताश व्यक्ति हमेशा हर काम में नुक्स निकालेगा और बिना वजह की नेगेटिव बातें भी बहुत करेगा। हताशा आपके जीवन के रफ्तार की दुश्मन है आपकी तरक्की का रोड़ा है हमेशा इसे अपने दिमाग में कभी जगह ना दे। जब भी आपको हताशा का अनुभव होने लगे आप अपने ईश्वर को याद करो अपना मनोबल बड़ाओ, अपने अच्छे मित्रों से बात करो और हर तरक्की पसंद व्यक्ति की ओर और देखो और आगे बढ़ो।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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