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हसीना कुमारी बनेंगी दिव्यांग भारत का सहारा

उदयपुर जिले के फालासिया क्षेत्र के एक छोटे से गांव में रहने वाले भारत कुमार आहारी की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है, लेकिन उन्होंने कभी अपनी चुनौतियों को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। बचपन से पोलियो से प्रभावित होने के कारण उन्हें चलने-फिरने और रोजमर्रा के कार्य करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, गांव के शांत और प्राकृतिक माहौल में पले-बढ़े भारत ने हमेशा जीवन को सकारात्मक नजरिए से देखा और अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाया।
सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने अपनी स्नातक शिक्षा पूरी की और आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ते रहे।
लेकिन जीवन की असली चुनौती तब सामने आई, जब बात विवाह की आई। समाज की संकीर्ण सोच और लोगों की कठोर बातें उन्हें अंदर तक तोड़ने लगीं। अक्सर लोग कहते, “वह दिव्यांग है, उससे कौन शादी करेगा? वह परिवार की जिम्मेदारी कैसे निभाएगा?” ऐसी बातें उनके दिल को गहरी चोट पहुंचाती थीं और कई बार उन्हें अकेलेपन का एहसास भी कराती थीं।
इसी दौरान उनकी मुलाकात फालासिया की रहने वाली हसीना कुमारी भोगोरा से हुई। हसीना की जिंदगी भी संघर्षों से अछूती नहीं रही थी। वह एक बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं। मां के निधन के बाद उनके पिता ने मजदूरी कर पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली। बचपन में एक दर्दनाक आग दुर्घटना ने हसीना की जिंदगी बदल दी। इस हादसे में उनका चेहरा और हाथ गंभीर रूप से झुलस गए और उनका एक हाथ स्थायी रूप से प्रभावित हो गया।
हालांकि, इन कठिन परिस्थितियों ने हसीना के हौसले को कभी कमजोर नहीं किया। चेहरे पर मुस्कान और मन में उम्मीद लिए उन्होंने हर मुश्किल का सामना किया। उनकी सकारात्मक सोच ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
समय के साथ भारत और हसीना ने एक-दूसरे के संघर्षों को समझा, दर्द को महसूस किया और एक-दूसरे को उसी रूप में स्वीकार किया जैसे वे हैं। यह रिश्ता किसी सहानुभूति पर नहीं, बल्कि समझ, सम्मान और विश्वास की मजबूत नींव पर खड़ा हु आ।
अब दोनों अपने जीवन की एक नई शुरुआत करने के लिए तैयार हैं। भारत कुमार आहारी और हसीना कुमारी भोगोरा 6 और 7 जून 2026 को दिल्ली में आयोजित होने वाले 46वें “दिव्यांग एवं आर्थिक रूप से कमजोर जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह” में विवाह बंधन में बंधेंगे। यह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि इस बात का उदाहरण है कि सच्चा साथ बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि दिलों के जुड़ने से बनता है।

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