उच्च न्यायालय ने कहा कि देश ने अवैध शराब के चलते बहुत सी त्रासदी झेली हैं। हाल ही में पंजाब में 100 से अधिक लोगों ने इसी अवैध शराब के चलते अपनी जान गंवाई थी। इस प्रकार के व्यक्तियों से दृढ़ता और सख्ती से निपटा जाना चाहिए, ताकि अवैध शराब के कारोबार में लिप्त होने से पहले लोग कई बार सोचें और ऐसा कर कीमती जीवन बचाया जा सके। उच्च न्यायालय ने कहा कि अवैध और जहरीली शराब का शिकार विशेष रूप से समाज के गरीब तबके से संबंधित लोग होते हैं क्योंकि यह बाजार में मिलने वाली शराब से तुलनात्मक रूप से सस्ती होती है जिसके चलते इस तबके के लोग इसका इस्तेमाल करते हैं और मौत का निवाला बन जाते हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि भले ही छापे में शराब बनाने की प्रक्रिया आरंभ नहीं थी लेकिन शराब बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल वहां मौजूद था। साथ ही न्यायालय ने कहा कि जांच और पूछताछ से बचने के लिए याची वहां से भागा, यदि याची की कोई गलती नहीं होती तो वह भागता नहीं और पुलिस को जांच में सहयोग करता। इस टिप्पणी के साथ ही उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।

