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हाई कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन एवं चेयर पर्सन,प्रिंसिपल और सचिव एसएमएस स्कूल, से जवाब तलब किया

जयपुर,(दिनेश”अधिकारी)। राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ के न्यायाधीश अरुण भंसाली ने मंजू भार्गव की रिट याचिका की सुनवाई पश्चात चेयर पर्सन एसएमएस स्कूल, सचिव एस एम एस स्कूल प्रिंसिपल एसएमएस स्कूल तथा सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन से जवाब तलब किया है उल्लेखनीय है कि प्रार्थीया ने राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिकरण के फैसले को चुनौती अधिवक्ता डी. पी. शर्मा के माध्यम से रिट याचिका प्रस्तुत कर निवेदन किया कि राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिकरण द्वारा पद समाप्ति के मामले में धारा 18 लागू नहीं मानना कानूनी भूल थी क्योंकि धारा 18 साधारण सेवा समाप्ति तथा लांछन युक्त सेवा समाप्ति पर लागू होती है इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय राजकुमार बनाम निदेशक प्रस्तुत किया जिसके तहत समान प्रकृति वाले दिल्ली के कानून में पद समाप्ति पर धारा 18 के समान दर धारा 8(2) को लागू माना और व्यवस्था दी कि सेवा समाप्ति से पूर्व शिक्षा निदेशक की अनुमति आवश्यक है जबकि अधिकरण ने फैसला दिया 18 केवल लांछन युक्त सेवा समाप्ति के मामलों में लागू होती है पद समाप्ति के मामले में लागू नहीं होती । रिट याचिका में प्रार्थी की तरफ से यह भी मांग की गई है कि सीबीएसई bye-laws की अवहेलना करने पर सीबीएसई को निर्देशित किया जावे की वह संस्था के विरुद्ध कार्यवाही करें। धारा 18 के तहत डिस्मिसल removal और रिडक्शन रैंक के अलावा टर्मिनेशन शब्द भी यूज़ किया गया है ऐसी स्थिति में पद समाप्ति के समय भी 6 माह का नोटिस या उसके बदले वेतन दिया जाना आवश्यक है तथा शिक्षा निदेशक से सहमति प्राप्त करना भी आवश्यक है। इसके अलावा प्रार्थी के अधिवक्ता का तर्क था कि संस्था द्वारा अपनी वेबसाइट में अभी भी डांस क्लास है चालू होना प्रदर्शित किया जा रहा है तथा सीबीएससी bye-laws के तहत डांस विषय अनिवार्य विषय में आता है संस्था द्वारा एक तरफ तो वेबसाइट दिखा करके यह प्रदर्शित किया जा रहा है कि उनके छात्रों को डांस की शिक्षा दी जा रही है तथा व्हाट्सएप ग्रुप में डांस , म्यूजिक प्रदर्शित किया जा रहा है और अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जा रही है और दूसरी तरफ डांस टीचर का पद समाप्त किया जा रहा है ऐसी स्थिति में पद समाप्ति का आदेश मनमाना है संस्था के द्वारा पद समाप्ति का विशिष्ट कारण नहीं बताया गया मामले की सुनवाई के पश्चात न्यायालय ने आदेश दिया है कि विपक्षी विपक्षी गण 18 अक्टूबर तक जवाब प्रस्तुत करें तथा यह भी कारण प्रदर्शित करें कि क्यों नहीं स्थगन आदेश जारी कर दिया जाए।

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