वड़ोदरा : गुजरात के वड़ोदरा में स्कूली छात्रों से भरी नाव की हरणी मोटनाथ झील दुर्घटना में कांट्रेक्टर की जानलेवा लापरवाही का खुलासा हुआ है। शुक्रवार को पुलिस ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए 18 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। वहीं, दो लोग पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
बता दें कि नाव में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया था। इतना ही नहीं 15 से 20 फीट गहरी इस झील में सभी छात्रों को लाइफ जैकेट भी नहीं पहनाई गई थी।
वडोदरा के डीएम एबी गौड़ ने कहा कि नाव की क्षमता 16 लोगों की थी, पर 34 लोग सवार थे। गुजरात के मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि हमें पता चला है कि नाव पर सवार सिर्फ 10 छात्र ही लाइफ जैकेट पहने हुए थे। जिससे पता चलता है कि संचालकों की लापरवाही के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) और 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य दोषियों को पकड़ने के लिए टीमें गठित की गई हैं।
वड़ोदरा पुलिस ने हरणी लेक पर लगे सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लिया है।
विदित हो कि इस घटना के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और डीएम से 10 दिन में जांच रिपोर्ट तलब की है। इससे पहले सीएम पटेल ने गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी के साथ वडोदरा के एसएसजी अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की।

हरणी झील में अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता ने फांसी की मांग की है। उनकी मांग है कि भ्रष्ट ठेकेदार और निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तो वहीं दूसरी ओर में निगम में हड़कंप है। सूत्रों से मिली जानकारी में सामने आया है परेश शाह को एक काफीर रसूखदार लोगों की सिफारिश पर ठेका दिया गया था। हादसे में सबसे बड़ी लापरवाही ठेकेदार की है, तो वहीं सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अफसरों ने अपनी ड्यूटी क्यों नहीं पूरी की। फिलहाल हरणी झील में नाव चला रहे ठेकेदार परेशा शाह को फरार बताया जा रहा है। यह भी सामने आया है वर्तमान में गांधीनगर में तैनात तत्कालीन निगम कमिश्नर इस ठेकेदार को कॉन्टैक्ट नहीं देता चाहते थे, लेकिन ऊंचे रसूखदार व्यक्ति के कहने पर आखिर में कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था।

इस घटना को लेकर वडोदरा नगरपालिका में कांग्रेस की नेता अमि रावत ने कहा कि हम इसे दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या का मामला मान रहे हैं। हम मांग करते हैं कि इस मामले की जांच कोई पदासीन जज करे। यह पूरी तरह लापरवाही का मामला है। डूबी हुई नाव में कोई लाइफ जैकेट या लाइफ गार्ड नहीं था। जिम्मेदारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिए। 2016 में जब इस प्रोजेक्ट को कॉन्ट्रैक्टर्स को सौंपा गया, तब हमने इस पर आपत्ति जताई थी।