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18 लाख परीक्षार्थी असमंजस में,रीट और व्याख्याता परीक्षा में टकराव

– कौनसी परीक्षा दे और कौनसी छोड़े ?

बीकानेर।शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के एक ट्वीट ने लाखों बेरोजगार युवाओं को असमंजस में डाल दिया है। गुरुवार को ट्वीटर पर रीट परीक्षा (Reet Exam) की तिथि घोषित कर दी लेकिन साथ ही 18 लाख युवाओं की परेशानी भी बढ़ा दी। शिक्षामंत्री ने ट्वीट किया कि 26 सितंबर को रीट परीक्षा का आयोजन करवाया जाएगा। उनकी इस घोषणा के साथ ही युवाओं के सामने एक बार फिर मुश्किल खड़ी हो गई वजह है कि इसी दौरान राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से 22 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आरपीएससी कॉलेज लेक्चरर की परीक्षा का आयोजन होना है। ऐसे में अब दोनों परीक्षाओं में टकराव होना तय है। राज्य भर में रीट परीक्षा में जहां 16 लाख परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। वहीं आरपीएससी लेक्चरर परीक्षा में लगभग दो लाख परीक्षार्थी भी पूरे राज्य से शामिल हो रहे हैं। इन दोनों परीक्षाओं में शामिल लगभग 18 लाख परीक्षार्थियों में से अधिकांश परीक्षार्थी वह हैं जो दोनों परीक्षाओं की तैयारियां एक साथ कर रहे हैं।

परीक्षार्थियों के भविष्य पर कुठाराघात

राजस्थान उर्दू बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष शमशुद्दीन सुलेमानी का कहना है कि शिक्षामंत्री ने एक बार फिर लाखों स्टूडेंट के भविष्य को असमंजस की स्थिति में डालकर भविष्य के दांव पर लगा दिया है। उन्होंने रीट की तिथि की घोषणा तो कर दी,लेकिन अधिकारियों से यह जानकारी प्राप्त नहीं की कि 26 सितंबर के आसपास या 26 सितंबर को क्या कोई और भी प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित होने वाली है या नहीं ।

– दो परीक्षाओं में टकराव

अधिकांश परीक्षार्थियों का कहना है कि भविष्य को देखते हुए दोनों परीक्षाएं कैरियर के लिए जरूरी है लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि रीट से जहां हम स्कूल शिक्षक बनेंगे वहीं आरपीएससी की लेक्चरर परीक्षा से व्याख्याता पद पर आसीन होंगे, इसलिए रीट परीक्षा के साथ साथ आरपीएससी लेक्चरर परीक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि रीट परीक्षा की तिथि को आगे बढ़ाया जाए, जिससे अभ्यार्थी आरपीएससी लेक्चरर भर्ती की परीक्षा में भी शामिल हो सकें।

संघर्ष समिति के ठाकुर शमशेर खाँ गाँधी(दांडी पद यात्री) ने पत्र के माध्यम से शिक्षा मंत्री को अपना वादा दिलवाया है जिसके तहत सभी संविदा कर्मियों को 30 सितंबर 2021 तक नियमित किया जाना है, तथा स्टाफिंग पैटर्न में संसोधन करके राजस्थान में अल्पभाषा (उर्दू, सिंधी, गुजराती, पंजाबी) के सभी रिक्त पदों को भरा जाना है।

प्रदेश अध्यक्ष शमशुद्दीन सुलेमानी ने बताया कि यदि सरकार ने समय रहते जिन मांगो पर सहमति बनी थी उस पर कार्यवाही नही की तो एक बड़े जन आंदोलन के लिए तैयार रहे। तथा राजस्थान में होने वाले पंचायत चुनाव में भी सरकार को विरोध झेलना पड़ेगा।

राज्य में सरकार रीट भर्ती समय पर करवाने और संविदाकर्मियों के नियमतिकरण के वादे के कारण सत्ता में आ पाई है। अगर सरकार वादा खिलाफी करती है तो सरकार के खिलाफ पूरे प्रदेश में गाँधी वादी लोकतांत्रिक तरीके से 2 अक्टूबर 2021 से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया जायेगा।

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