लाखों जैन सामायिक कर विश्व शांति के लिए प्रार्थना करेंगे – सुनील सांखला जैनबेंगलुरु।जैन धर्म अनादिकाल से विद्यमान है। तीर्थंकर भगवान को केवलज्ञान होने के बाद शासन की स्थापना करते हैं। प्रभु वीर साढ़े बारह वर्ष की घोर साधना करके वैशाख शुक्ल 10 के दिन चार घाती कर्म के क्षय करके केवल ज्ञान की प्राप्ति करते हैं और तुरंत समवसरण में देशना देते हैं। प्रभु की वाणी सुनकर इंद्रभूति गौतम स्वामी सहित 11 गणधरों ने दीक्षा ली। चंदनबाला साध्वी बनीं, बारा व्रतधारी श्रावक-श्राविका बनें, और फिर प्रभु वीर ने श्रमण-प्रधान चतुर्विध संघ (साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका) की स्थापना की, वह दिन है “वैशाख शुक्ल एकादशी” अर्थात “शासन स्थापना दिवस”। महावीर प्रभु का जिन शासन 21000 वर्ष तक चलेगा जो वर्तमान में चल रहा है। तब से अब तक जैन धर्मावलंबियों द्वारा हर वर्ष शासन स्थापना दिवस पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और विश्व शांति व कल्याण की कामना व भावना व्यक्त की जाती है। प्रभु महावीर ने चतुर्विध संघ की स्थापना कर हम पर अनंत उपकार किया। जैनियों के लिए यह गौरव का अत्यंत ऐतिहासिक दिन है।

जैन एसोसिएशन इंटरनेशनल के चेयरमैन सुनील सांखला जैन ने बताया कि वर्तमान कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन की स्थिति में समस्त जैन समाज से निवेदन किया गया है कि रविवार दिनांक 23 मई 2021 के इस पावन दिवस पर अपने-अपने घर पर परिवार एक साथ एक-एक सामायिक प्रातः: 9 बजे से करने का लक्ष्य रखे। पुरे विश्व में जैन धर्मावलम्बी इस पावन दिवस पर लाखों सामायिक कर विश्व में सभी प्राणियों के प्रति मंगलकामना करेंगे और उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करेंगे। भारत में करीब पंद्रह हज़ार से ज़्यादा साधु-साध्वी अलग- अलग क्षेत्र में विराजमान है, वह भी इस दिन विश्व शांति के लिए प्रार्थना करेंगे । साथ ही अपने-अपने घर में जैन ध्वज लगाए एवं ध्वज प्रति सम्मान व श्रद्धा का संकल्प भी लें। सांखला के मुताबिक छोटे छोटे नियम लेने की अपील की जा रही है। त्याग करने से एकाग्रता बढ़ती है, संकल्प शक्ति मजबूत होती है और कर्म निर्जरा सहज ही होती है। उन्होंने बताया कि यह श्रेष्ठ अवसर है कि साधुजी-साध्वीजी की वैयावच्च, साधर्मिक भक्ति, अनुकम्पा, जीव दया, नागरिक सेवा, तन मन धन से यथाशक्ति प्रयत्न किया जाए।सांखला ने बताया कि विशेष वर्तमान परिस्थितियों में भौतिकता से प्रभावित इस संसार में हर व्यक्ति वास्तविक सुख की खोज में भटक रहा है। इस भटकन को दूर करने का और वास्तविक सुख के साक्षात्कार के लिए सामायिक एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है। सुख-दुख का प्रश्न व्यक्ति के संतुलन-असंतुलन से जुड़ा है।

सुखी वही है जो संतुलित है। दुखी वही है जो असंतुलित है। दुख में सुख को पा लेने की प्रक्रिया है सामायिक। सामायिक की आराधना का अर्थ है जीवन में संतुलन। यह आत्मा में लीन होने की साधना है।जैन एसोसिएशन इंटरनेशनल के संयोजन में समस्त जैन समाज द्वारा विश्व स्तर एक सामायिक शासन के नाम के रूप में मनाते हुए सामायिक के सामूहिक प्रयोग एवं अनुष्ठान को आयोजित करने का निर्णय लिया है। सांखला ने बताया कि यह दिवस हर व्यक्ति के जीवन में व्यापक परिवर्तन घटित करते हुए जीवन में सुख, शांति, प्रसन्नता, सभी स्वस्थ हो, समृद्धि एवं शक्ति हो, एक सामायिक शासन के नाम को नियोजित एवं व्यवस्थित स्वरूप देने के उपक्रम है। वर्चुअल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से गुरु भगवंतों द्वारा विशेष सन्देश एवं मंगलपाठ प्रदान करेंगे ।