

चकाचौंध युग का सिद्धि प्रदाता विज्ञान, जो कल तक सृष्टि के रचयिता से खिलवाड़ करता था वह झोलाछाप आज पंगु बना बैठा नरसंहार देखने के सिवाय कुछ भी करने में असमर्थ वान बन बैठा।
संसार का वह बुद्धिमान व्यक्ति,जो धर्म कर्म की बात को, पुनर्जन्म मरण की बात को, स्वर्ग नरक की बात को अंधविश्वास बताने वाला, पैसों के लालच में और संसार का सबसे अमीर बनने की अभिलाषाओं में
हिंसक घटनाओं का जनकदाता बन चुका था, आज वही अपंग होकर असहाय सा पड़ा किसी कोने में रो रहा हैं, कोई उसे सुनने वाला नहीं ।


महामारी विकराल रूप धारण कर रही है, लगभग 40 लाख संक्रमित होने को हैं,निकट भविष्य में वायरस के हवा में फैलने की संभावना जताई जा रही है लक्षण रुप प्रवर्तित हो रहा है, सैनिक यौद्धा, ऑफीसर, प्रधानमंत्री, और राजघराने से लेकर कोरोना वाॅरियर्स तक कोई वंचित नहीं हो पा रहा है ऐसी स्थिति में सर्वत्र प्रयासरत रहते हुए हमें सृष्टि रचयिता पालनकर्ता से हुई असाधारण त्रुटि के लिए 4 गति 84 लाख जीवायौनि से अन्तःकरण से क्षमा मांगनी चाहिए।
संसार में जब जब राक्षसी प्रवृत्तियां या महामारियों का असहाय प्रकोप हुआ है तो ऋषियों-मुनियों के तपोबल व मंत्र साधना से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान ने सृष्टि की रक्षा की है। यह इतिहास साक्षी है हमें पुनः आत्मचिंतन करना चाहिए।
ईतफाक से क्या हमें वहीं दृश्य दृष्टिपात नहीं हो रहा? यदि ऐसा ही प्रतीत होता है तो हमें आध्यात्मिक दृष्टि से चिंतन करना चाहिए और राम,रहिम,कृष्ण,ईसा मसीह, महावीर,बौध, गुरु नानक, तुलसी, महाप्रज्ञ जैसे महान ऋषि मुनियों द्वारा प्रदत्त शास्त्रों के गौरवशाली ग्रंथों में झांकना चाहिए ।


विश्व के महानायक,प्रभावशाली,समृद्धशाली व्यक्तित्वों व धर्मगुरुओं को दुनिया की780 करोड़ जनता जनार्दन को एक मंचस्थ जोड़ने हेतु ” अहिंसा शक्तिपीठ ” मंच का निर्माण करना चाहिए और शक्तिशाली दिव्य प्रकाश पुंज मंत्रोच्चारों का विश्वव्यापी अखंडपाठ का आयोजन ” अखंड मंत्रोच्चार – महामारी का समाधान” के विशाल कार्यक्रम को श्रृंखलाबद्ध घर घर व्यक्ति व्यक्ति की एक चैन के माध्यम से आयोजित करना चाहिए। भले ही मन्दिर,मस्जिद,चर्च,गुरुद्वारा, धर्म साधना केंद्र का द्वार बन्द हुआ हो किन्तु हमारे हृदय पट्ट का द्वार खुला रहें।
पौराणिक कथाओं में वर्णित मिलता है कि आस्था ,श्रृद्धा ,मंत्रोच्चार में अथाह शक्ति समाहित है ! फिर देर किस बात की,आईये हम सब मिलकर सबसे पहले सृष्टि से मानवजनित हुई अपनी त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करें और पुर्ण आस्था के साथ धर्माचार्यों द्वारा जारी दिशानिर्देश अनुसार अखंडपाठ के महाकुंभ में सहभागी बनें और मोबाइल के द्वारा संयुक्त प्रयास को एक माला में पिरोने का प्रयास करें ।
आस्थावान व श्रृद्धालुओं की एकात्मकता से की गई प्रार्थनाओं से हमें देव गुरु व धर्म की अनुकम्पा से इस असाधारण विनाशकारी महामारी की शान्ति के लिए मार्गदर्शन जरुर मिलेगा, और अशांत विश्व में शांति का पुनःमाहौल बनेगा।
हां भविष्य के लिए हमें संकल्पबद्धता से यह प्रयास करना होगा कि आध्यात्मिक व विज्ञान को समायोजित करके ही भविष्य की नींव रखें।
