बीकानेर , (ओम एक्सप्रेस ) समकालीन राजस्थानी साहित्य के अंतर्गत ‘कोरोनाकाल और नवसृजन’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय राजस्थानी समाज द्वारा आयोजित सजीव प्रसारण में जितेंद्र निर्मोही, मनोज कुमार स्वामी, नीलम पारीक और डॉ. नीरज दइया ने भाग लिया। कोटा के वरिष्ठ रचनाकार जितेंद्र निर्मोही ने कहा कि राजस्थानी साहित्य में विपुल मात्रा में सृजन हो रहा है और विधाओं में प्रयोग भी सराहनीय है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में कोटा संभाग में राजस्थानी में गद्य लेखन में गति देख सकते हैं वहीं यहां कथा-साहित्य, बाल साहित्य और अनुवाद के कार्यों के प्रति भी रुझान साहित्यकारों का बढ़ा है।
चर्चा में सूरतगढ़ से शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी ने कहा कि राजस्थान के अलग अलग हलकों में आज राजस्थानी में बहुत उच्च कोटि का लेखन और प्रकाशन हो रहा है। उन्होंने भाषा को जनता से जोड़ने के प्रयासों में सूरतगढ़ में रामलीला मंचन को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका सजीव प्रसाण लाखों दर्शकों तक पहुंचने और राजस्थानी रचनाओं के हिंदी-अंग्रेजी अनुवाद के कारण राजस्थानी की बात दूर-दूर तक पहुंच रही है। कवयित्री नीलम पारीक ने कहा कि राजस्थान के स्कूलों में सभी भाषाएं और विषयों को पढ़ाने के लिए बच्चों की मातृभाषा राजस्थानी की अहम भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सीखने में सरलता और सहजता राजस्थानी के माध्यम से अनुभव होती है किंतु पुस्तकालयों में बच्चों के लिए राजस्थानी में किताबें बहुत कम उपलब्ध है। कवि आलोचक डॉ. नीरज दइया के कहा कि किसी भी विधा में लिखने से पहले अपनी भाषा के साथ भारतीय और विश्व साहित्य का अध्ययन लाभकारक होता है इसी अध्ययन से हम अपनी भाषा के लिए अनुवाद के लिए प्रिय और जरूरी कृतियों का चयन कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय राजस्थानी समाज द्वारा आयोजित सजीव प्रसारण में साहित्यकार बुलाकी शर्मा, चंद्रकांता, राजेंद्र जोशी, डॉ. लक्ष्मीकांत व्यास, डॉ. सुरेश सालवी, प्रमोद शर्मा, राजेंद्र शर्मा ‘मुसाफिर’, दिनेश पंचाल, भंवरलाल सुथार, अलका अग्रवाल, निर्मला राठौड़, डॉ. अनिता जैन, प्रहलाद राय पारीक, डॉ. सत्यनारायण सोनी, प्रमोद कुमार शर्मा, ओम नागर, डॉ. मदन गोपाल लढ़ा, शिवचरण शिवा, प्रहलाद सिंह झोरड़ा, सीमा राठौड़, कुमार राजेंद्र सेन, राकेश कुमार शर्मा, इसरार हसन कादरी, मुकेश दैया, शंकर धाकड़, प्रशांत जैन, भुपेंद्र नायक, राम रतन लाटियाल समेत सौ से अधिक लेखकों और राजस्थानी प्रेमियों ने हिस्सा लिया तथा कार्यक्रम को तीन सौ से अधिक दर्शक मिले।