बारां, राजस्थान: ‘विश्व के मूल निवासियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ पर, पीडब्ल्यूसी इंडिया फ़ाउंडेशन ने राजस्थान के बारां ज़िले में सहरिया आदिवासी समुदाय के बीच स्थायी आजीविका और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।

पिछले साल आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे इलाके में फ़सलों को भारी नुकसान पहुँचाया, जिसके चलते इस संवेदनशील आदिवासी समूह को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। पीडब्ल्यूसी इंडिया फ़ाउंडेशन ने स्थायी खेती को बढ़ावा देकर, महिलाओं के लिए उद्यमिता के अवसर उत्पन्न कर और आर्थिक मज़बूती बढ़ाकर समुदायों की मदद के लिए कदम बढ़ाए ताकि स्थायी (सस्टेनेबल) आजीविका को बढ़ावा मिल सके।

इस मौके पर, पीडब्ल्यूसी इंडिया फ़ाउंडेशन के वाइस चेयरमैन जयवीर सिंह ने बारां का दौरा किया और मंजरी फाउंडेशन के सहयोग से चलाए जा रहे प्रोजेक्ट के लाभार्थियों से बातचीत की। उन्होंने तीन गांवों की महिलाओं से बातचीत की और सब्जी की खेती, वर्मीकम्पोस्टिंग, बकरी पालन और बायो-रिसोर्स से जुड़ी पहलों का प्रभाव देखा, जिनके कारण सहरिया जनजाति के लिए स्थायी आर्थिक अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।

इस अवसर पर पीडब्ल्यूसी इंडिया फाउंडेशन के वाइस चेयरमैन जयवीर सिंह ने कहा, “पीडब्ल्यूसी इंडिया फाउंडेशन में हमारा मानना है कि समुदायों के साथ मिलकर काम करने से ही स्थायी प्रभाव उत्पन्न किया जा सकता है। इससे उनकी क्षमताएं मजबूत होती हैं, उन्हें बेहतर अवसर मिलते हैं और उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ती है। सहरिया समुदाय के साथ जुड़ाव हमारी इसी प्रतिबद्धता और भरोसे को दिखाता है कि समावेशी विकास में कोई भी पीछे नहीं छूटना चाहिए।’

इस अवसर पर मंजरी फाउंडेशन के एक्ज़क्टिव डायरेक्टर संजय शर्मा ने कहा, ‘‘सही मायनों में बदलाव भरोसे, आपसी सहयोग और स्थायी मौजूदगी से ही आ सकता है। पीडब्ल्यूसी इंडिया फाउंडेशन के साथ साझेदारी में हमने सहरिया समुदाय के लिए ऐसे अवसर उत्पन्न किए हैं जो सिर्फ आजीविका के दायरे से कहीं बढ़कर हैं। इससे उनका आत्मविश्वास लौटा है, मुश्किलों से लड़ने की क्षमता बढ़ी है और इन ग्रामीण परिवारों, खासकर महिलाओं को आय की सुरक्षा और आज़ादी मिली है। हमारे प्रयासों के चलते इन लोगों की ज़िंदगी और आजीविका में आए बदलाव हमें संतोषजनक अनुभव प्रदान करते हैं।’’

हालांकि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पूरे आदिवासी समुदाय को सशक्त बनाना है, किंतु सहरिया महिलाएं इसके केंद्र में हैं। इन प्रयासों के चलते वे खेतीहर मज़दूर के दायरे से आगे बढ़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन गई हैं। पीडब्ल्यूसी इंडिया फाउन्डेशन अकेली या विधवा सहरिया महिलाओं को बकरी पालन और स्थायी खेती के माध्यम से भी सहयोग प्रदान करता है, जिससे उनकी आय सुरक्षा बेहतर हो रही है।

जयवीर सिंह ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, ‘‘अपने विज़िट के दौरान इन महिलाओं का दृढ़ संकल्प और मुश्किलों से लड़ने की क्षमता देखना, बहुत अच्छा अनुभव रहा। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की उनकी यात्रा दर्शाती है कि समुदाय के नेतृत्व में किए गए प्रयास कैसे स्थायी बदलाव ला सकते हैं। हम ऐसी पहलों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो आजीविका को मजबूत बनाएं, मुश्किलों से लड़ने की क्षमता बढ़ाएं और सुरक्षित एवं स्थायी भविष्य का मार्ग प्रशस्त करें।’’

इस तरह की पहलों के ज़रिए, पीडब्ल्यूसी इंडिया फाउन्डेशन समुदायों और साझेदारों के साथ समाज पर दीर्घकालिक एवं स्थायी प्रभाव उत्पन्न करने के लिए तत्पर है। इसी सोच के साथ फाउन्डेशन आजीविका को बढ़ावा देता है, कमज़ोर वर्गों को अवसर प्रदान करने उनकी आय सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।