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तप व उपवास करके मुनिश्री राजकरण स्वामी की मनाई हीरक जयंती


ओम एक्सप्रेस न्यूज. बीकानेर। तेरापंथ धर्मसंघ बहुश्रुत परिषद के वरिष्ठ सदस्य, तत्त्वज्ञानी गंगाशहर में विराजित मुनिश्री राजकरण स्वामी की गुरुवार को दीक्षा की हीरक जयंती मनाई गई। संयोजक सूर्यप्रकाश सामसुखा ने बताया कि संयम जीवन के 75 वर्ष पूर्ण होने पर मुनिश्री का धर्मसंघ के लोगों ने आशीर्वचन प्राप्त किया। सामसुखा ने बताया कि सबसे बड़ी बात यह रही कि हीरक जयंती के आयोजक इन्द्रचन्द सामसुखा की प्रेरणा से जैन, अजैन, श्वेताम्बर, दिगम्बर तथा पारिवारिक सदस्यों ने तप व उपवास करके मुनिश्री को अभिवंदन करने का निर्णय लिया था, इनमें 108 जनों ने तेला, 866 घंटे मौन, 153 एकासन, 58 आयंबिल, 74 उपवास, 324 सामयिक तेला तथा 182 जनों ने एक दिवसीय अखंड जाप करके मुनिश्री को शुभकामनाएं प्रेषित की।


आयोजक इन्द्रचन्द सामसुखा ने बताया कि आचार्यश्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती 91 वर्षीय मुनिश्री राजकरण स्वामी का जन्म 15 मार्च 1927 में हुआ तथा 16 वर्ष की आयु में ही आचार्यश्री तुलसी से दीक्षा ग्रहण कर ली थी। गंगाशहर के मूल निवासी मुनिश्री ने 25 एकान्तर वर्षी तप भी किए हैं। सामसुखा ने बताया कि छूआछूत को दरकिनार करते हुए इन्होंने हर जाति वर्ग के यहां से गोचरी (भिक्षा) ली। अवधान विधा के जानकार मुनिश्री ने सुदूर क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार करते हुए करीब सवा तीन लाख विद्यार्थियों को अणुव्रत प्रेक्षाध्यान और जीवन विज्ञान का ज्ञान दिया। नशा मुक्ति के क्षेत्र में मुनिश्री ने अनूठे आयाम प्रस्तुत किए जिनमें मेघवाल जाति के लगभग 10 हजार जनों को व्यसन से मुक्ति होने की प्रेरणा दी। गुजरात, आंध्रप्रदेश, रामेश्वरम् कन्याकुमारी, भूटान तथा नेपाल सहित दक्षिण व पूरब की लगभग एक लाख किमी पैदल यात्रा कर लोगों को व्यसन व संयम की सीख दी।

शोभायात्रा निकाली- संयोजक सूर्यप्रकाश सामसुखा ने बताया कि मुनिश्री की दीक्षा के 75 वर्ष पूर्ण होने पर गंगाशहर के विभिन्न मार्गों से शोभायात्रा निकाली गई। सामसुखा परिवार की महिलाओं व युवाओं द्वारा बनाई गई गीतिका प्रस्तुत की गई। करणीदान, जीवराज, शुभकरण सामसुखा द्वारा मुनिश्री को अभिनन्दन पत्र भेंट किया गया जिसका वाचन इन्द्रचन्द सामसुखा ने किया। कीर्तिकुमार सामसुखा ने पद्यों द्वारा मुनिश्री के जीवन चरित्र का परिचय दिया।

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