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मनुष्यों को जीवन में कभी भी अंहकार नहीं करना चाहिए :मुरलीधरजी

नोखा। मनुष्यों को अपने जीवन में कभी भी अंहकार नहीं करना चाहिए, अहंकार से मनुष्य का जीवन नरक बन जाता है व जीवन का नाश भी होता है इसलिए हमेशा अंहकार से दूर ही रहना चाहिए यह कहना था यहां मूलवास सीलवा में गौ सेवी पदमाराम कुलरिया की ढाणी पदम पैलेस में पिछले छ:दिनो से चल रही श्रीराम कथा में कथा वाचक संत श्रीमुरलीधर जी महाराज का। उन्होने सीता के स्वंयवर के प्रसंग में बताया राजा जनक के यहां सीता के स्वंय वर में दस हजार राजा आए थे परन्तु उनमें अहंकार भरा हुआ था जिसके कारण वो धनुष को नहीं तोड़ सके और श्रीरामजी में अहंकार नहीं था तो उन्होने धनुष को तोड़ दिया। उन्होने कहा कि संसार कोई छोटा-बड़ा नही होता, परन्तु पद का स मान करना चाहिए। उन्होने कहा पद बड़ा होता इसलिए अपने से बड़ो का गुरू, संतो, ब्राह्मणो का स मान करना चाहिए। गुरूवार को कथा के छठे दिवस पर श्रीराम के सीता स्वयंवर की कथा में बताया कि दस हजार राजा एक साथ मिलकर भी धनुष को उठा नही से जिसे रामजी ने एक उंगली से उठाकर तोड़ दिया। बुधवार को श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम व लक्ष्मण की जनकयात्रा व जनक में राजा जनक के दरबार में धनुष तोडऩे की कथा के बाद राम का जनक नंदनी के स्ंवयवर की श्रंृगारसर की कथा का प्रसंग विस्तार सुऩाया।

सिकुडऩे लगा है विशालकाय पांडाल पदम पैलेस में चल रही कथा में गुरूवार पांडाल सीमाओं से बाहर श्रद्धालु पंहुचे हजारो की सं या में आए श्रद्धालुओं भीड़ के कारण पांडाल सिकुडऩे लगा है। यहां कथा के आयोजक कुलरिया परिवार द्वारा कथा प्रारंभ के दुसरे दिन से विशालकाय बने पांडाल को बढाया जा रहा है परन्तु दिन प्रतिदिन श्रद्धालुओं भीड़ बढती जारही है। साथ ही करीब 100 बसे आस पास के गांवो से यहां खचाखच भरी हुई आ रही है। इसके अलावा यहां सैकड़ो छोटे वाहनो से भी श्रद्धालुओं के पंहुचने का शिलशिला जारी है। रामचरित मानस का किया पूजन गुरूवार को श्रीरामकथा प्रारभ से पूर्व रामचरित मानस का पूजन गौसेवी पदमाराम कुलरिया, उगमाराम, देवाराम, मघाराम, कानाराम, भंवरलाल, शंकर,धर्म, सुरेश, नरेश, पुखराज, मोहनलाल, मोटाराम, मूलाराम, पुष्पा, लक्ष्मी व मुन्नी आदि के साथ कुलरिया परिवार के सदस्यों रामचरित मानस का पूजन किया।


इन संतो का हुआ स्वागत सीलवा में श्रीराम कथा बुधवार को श्री बालाजी के अडग़ड़ानदजी के आश्रम से आए संत गुरूचरण दासजी, ऋिषिनाथजी, सरस्वतीनाथजी सरदारशहर, देवनाथ व पूजनदासजी महाराज के अन्य संतो को शॉल ऑढ़ाकर गौसेवी पदमाराम कुलरिया, देवाराम, उगमाराम, मघाराम, भंवरलाल, कानाराम, शंकरलाल व धर्म कुलरिया ने शॉल ओढ़ाकर कर स्वागत किया। इसके अलावा दूर दराज से आए गणमान्यो का स्वागत भी किया गया। बच्चो का हुआ समान गौसेवी पदमाराम कुलरिया द्वारा तहसील की विभिन्न स्कूलों में रामचरित मानस की चौपाइयों पर आधारित परीक्षा का आयोजन किया गया था जिसमें सफल रहे विद्यार्थियों का मंच पर गौसेवी पदमाराम कुलरिया व उनके पुत्र कानाराम, शंकर व धर्म कुलरिया द्वारा स मान किया गया।(PB)

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