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अब ऊँटनी के दूध से बनी आइसक्रीम एनआरसीसी में बिक्री हेतु तैयार

बीकानेर । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् -राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर ने ऊँटनी के दूध से विकसित उत्पादों की श्रंखला में एक और इजाफा करते हुए हाल ही में लॉन्च कैमल मिल्क आइसक्रीम की बिक्री प्रारम्भ कर दी है जो कि केन्द्र में स्थित मिल्क पार्लर में 20 रुपये से प्रारम्भ होकर विभिन्न आकर्षक पैकिंग में ‘करभ आइसक्रम‘ के नाम से उपलब्ध है। यह उत्पाद बटर स्कॉच, वनीला, पाईनएप्पल और केसर सहित अलग अलग में फ्लेवर में बिक्री हेतु उपलब्ध रहेगा। एनआरसीसी में आइसक्रीम की यह सुविधा समारोह आदि आयोजन हेतु भी पूर्व बुकिंग/सूचना के आधार पर उपलब्ध रहेगी।


कैमल मिल्क आइसक्रीम की बिक्री के शुभारम्भ पर केन्द्र निदेषक डॉ.एन.वी.पाटिल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केन्द्र पिछले डेढ़ दषक से ऊँटनी को एक दुधारू पशु के रूप में स्थापित करने की कवायद में लगा रहा तथा इसकी क्रियान्विति हेतु केन्द्र ने न केवल अनुसंधान द्वारा इसकी दूध की औषधीय गुणवत्ता को सिद्ध किया बल्कि कैमल डेरी एवं मिल्क पार्लर की स्थापना कर ऊँट पालकों को इस व्यवसाय हेतु प्रेरित किया है। केन्द्र ने ऊँटनी के दूध के विभिन्न दुग्ध उत्पाद विकसित कर इनकी आमजन में स्वीकार्यता को सिद्ध किया, इसी कड़ी में इस दूध के मूल्य संवर्धन को ध्यान में रखते हुए इसके दूध से करभ नामक आइसक्रीम का उत्पादन प्रारम्भ किया गया है। अन्य दूध उत्पादों सहित इसके मार्फत ऊँट पालकों की आय में आषातीत वृद्धि की जा सकती है। निदेषक डॉ.पाटिल ने इस तकनीकी के प्रसार के बारे में कहा कि केन्द्र में निर्मित ऊँटनी के दुग्ध उत्पादों के निर्माण की पद्धति को जानने-सीखने हेतु किसान व उद्यमी प्रषिक्षण प्राप्त कर सकते हैं ताकि वे अपने स्तर पर व्यवसाय को शुरू कर सके।
डॉ.देवेन्द्र कुमार, प्रभारी उष्ट्र दुग्ध प्रसंस्करण इकाई ने जानकारी दी कि केन्द्र के इस उत्पाद में ऊँटनी के दूध में क्रीम, शुगर, फूड ग्रेड कलर व सुगन्ध का इस्तेमाल किया गया है। डॉ.देवेन्द्र ने कहा कि हाल में आइसक्रीम प्लान्ट लगाया गया है जिसमें मिल्क होमोजेनाईजर, बैच आइसक्रीम फ्रीजर और आइसक्रीम हार्डनिंग कैबिनेट शामिल है। आषा है कि सैलानियों एवं आमजन में इस उत्पाद के रसास्वादन का अधिक क्रेज (उत्सुकता) रहेगा। (PB)

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