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भारत ने अंतरिक्ष में रचा सुनहरा इतिहास, हर तरह के मौसम में रहेगी सीमाओं की निगरानी

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इसरो ने बुधवार को रिसेट-2बी उपग्रह का सफल प्रक्षेपण कर एक बार फिर सुनहरा इतिहास रच डाला. श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी46 से रडार इमेजिंग अर्थ सैटेलाइट (रिसैट-2बी) लांच कर दिया है. इसरो के मुताबिक, पीएसएलवी राकेट ने रिसैट-2बी को लेकर सुबह 5.27 मिनट पर उड़ान भरी. यह सैटेलाइट खुफिया निगरानी, कृषि, वन और आपदा प्रबंधन सहयोग जैसे क्षेत्रों में मदद करेगा.

रीसैट-2बी सैटेलाइट का इस्तेमाल किसी भी तरह के मौसम में टोही गतिविधियों, रणनीतिक निगरानियों और आपदा प्रबंधन में आसानी से किया जा सकेगा. रीसैट-2बी सैटेलाइट के साथ सिंथेटिक अपर्चर रडार (सार) इमेजर भेजा गया है. इससे संचार सेवाएं निरंतर बनी रहेंगी.
रीसैट-2बी सैटेलाइट अंतरिक्ष में भारत के लिए आंख के तौर पर काम करेगी
यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में भारत के लिए आंख के तौर पर काम करेगी. इससे भारतीय सुरक्षा बलों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी रखने में काफी सहायता होगी. इस सैटेलाइट से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी शिविरों की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी.


हर तरह के मौसम में जारी करेगा तस्वीर
इसरो के अनुसार बादल होने पर रेगुलर रिमोट सेंसिंग या ऑप्टिकल इमेजिंग सैटेलाइट धरती पर हो रही छोटी गतिविधियों की सही स्थिति नहीं दिखा पाते हैं. सिंथेटिक अपर्चर रडार (सार) इस कमी को पूरा करेगा. इसकी मदद से किसी भी मौसम में चाहे घने बादल हों, मूसलाधार बारिश हो या फिर रात का अंधेरा, ये सही तस्वीर जारी करेगा. इससे आपदा के समय राहत पहुंचाने और सुरक्षाबलों को दुश्मनों के ठिकानों की सही जानकारी मिलने में आसानी होगी.

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