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भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया में धर्म के प्रति निष्ठा, त्याग और सेवा की भावना अनुपम : रावत

ऋषिकेश/बीकानेर । गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान के तहत भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया ने की एक करोड़ रुपए देने की घोषणा ऋषिकेश में गंगा तट पर परमार्थ निकेतन में संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम में सोमवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्रसिंह रावत पहुंचे। इस अवसर पर गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान में कथा आयोजक भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया ने अपने पिता दुलारामजी कुलरिया की स्मृति में एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री रावत ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि पुण्यात्मा संत दुलाराम कुलरिया के संस्कारों से पोषित भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया में धर्म के प्रति निष्ठा, त्याग और सेवा की भावना अनुपम है। कथा व्यास सींथल पीठाधीश्वर क्षमारामजी महाराज एवं परमार्थ निकेतन के अधिष्ठाता स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इस घोषणा को संत दुलारामजी कुलरिया के संस्कारों का सुफल बताते हुए भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया को आशीर्वाद दिया।

51 किलो की माला व सफा पहनकर किया से उतराखंड मुख्यमंत्री का सत्कार

इससे पूर्व कथा आयोजक भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया के साथ गोसेवी पदमाराम कुलरिया, उगमाराम, देवकिशन, मघाराम, चीमाराम, अशोक, राजेश, नरेन्द्र, जगदीश कुलरिया एवं परिवारजनों ने 51 किलो की पुष्पमाला एवं राजस्थानी साफा पहनाकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्रसिंह रावत का स्वागत किया। सींथल पीठाधीश्वर क्षमारामजी एवं स्वामी चिदानन्दजी ने मुख्यमंत्री को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

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मंत्री सतपाल महाराज भी पहुंचे

शाम को उत्तराखंड सरकार के ङ्क्षसचाई, पर्यटन एवं तीर्थाटन मंत्री सतपाल महाराज भी कार्यक्रम स्थल पहुंचे। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अधिष्ठाता स्वामी चिदानन्दजी सरस्वती और भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया व परिवारजनों के साथ गंगा आरती की। गंगा स्वच्छता अभियान के लिए एक करोड़ रुपए के योगदान की घोषणा पर सतपाल महाराज ने पवित्र भाव भक्ति से भरे भंवर-नरसी-पूनम कुलरिया की सेवा भावना को अनुकरणीय बताया।

कथा में भक्ति का महत्व बताया

इससे पूर्व कथा व्यास सींथल पीठाधीश्वर क्षमारामजी महाराज ने कथा कार्यक्रम में जड़-भरत संवाद, हिरण्यकश्यप वध, अजामिल उद्धार व नारद द्वारा दक्ष पुत्रों को ज्ञान, वृतासुर वध, गजेन्द्र मोक्ष, समुद्र मंथन आदि प्रसंगों के माध्यम से भगवन्नाम और भगवान की भक्ति का महत्व बताया।

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