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लेडी लक……!!!!!

 

लेडी लक……!!!!!

दुनिया का हर इलज़ाम जब तक औरतो पर ना डाला जाए तब तक कोई कार्य पूरा नही माना जाता। किसी भी घटित घटना उर्फ़ ज़रा सी बात को अगर आदमी असंवेदनशील हो कर नज़रअंदाज़ कर दे तो उस पर ‘जोरू का गुलाम’ होने की तख्ती समाज द्वारा लटक दी जाती है। (नज़रअंदाज़ करे आदमी और इलज़ाम औरत पे)

Rajsi Swaroop
Media Student
Lucknow

अब जब वह आदमी ज़िन्दगी में कुछ करने की सोचता है तो लोग उसे ‘लेडी लक’ के भरोसे छोड़ देते है। मतलब साफ़ है अगर मुकाम हासिल कर लिया तो खुद की मेहनत (कारण स्त्री से वियोग) अगर असफल हुए तो लेडी लक (कारण स्त्री का संयोग)
‘वो तो मनहूस है ही ,ज़िन्दगी बर्बाद कर दी उसकी ‘
अभी हाल ही मे इस तरह के लांछन का घटनाक्रम आपको याद होगा । जिसका शिकार अनुष्का शर्मा हुई। जब तक विराट सफल हुए वो उनकी मेहनत थी जिस दिन असफल हुए सारा ठीकरा अनुष्का के सर फोड़ दिया। समझ नही आता है की ये इसलिए हुआ क्योंकि ये पुरुष प्रधान देश है या ये हिंदुस्तान है , जहा औरतो का नसीब उनसे जुड़े मर्दों के कार्य और कामयाबी से आक़ा जाता है। चलिए इसको अगर सच मान ले तो बात बराबरी की होनी चाहिए मसलन ‘लेडी लक’ जैसी कोई बात आदमियो पे लागु होती है तो कोई ‘जेंटलमेन लक’ भी होना चाहिए जो औरतो पे लागू हो …..
आखिर हर बार आदमी ही क्यों नाकारा साबित हो …..औरतो को भी भोगना पड़े बराबर से….. । गुस्ताखी माफ़ कीजियेगा पर थोडा सोचिये तो अगर ऐसा होता तो हिंदुस्तान के मर्द सबसे मनहूस है लक के मामले में क्योंकि यहाँ की औरतो की हालात सबसे बुरी है गिनती की कुल 25% ही सफल है बाकि तो घर गिरस्ती और घरेलू हिंसा से ढकी हुई है।
फेसबुक की फीड पढ़ते हुए अचानक एक पोस्ट पे नज़र गई जहा लिखा था अभी तक मुम्बई इंडियन लूट रही है जब से रोहित ने सगाई की उनका लेडी लक काम नही आया है ।फिर जब वही टीम प्लेऑफ तक पहुच गई तो वही अकाउंट कहता है की ये उनकी टीम वर्क और मेहनत का कमाल है….
ऐसी बिखरी और चिल्लर सोच रखने वालो को कोई ये बताओ की क्रिकेट में आप अपनी फॉर्म और फिटनेस को खरीद नही सकते हो चाहे कितने ही अमीर क्यों न हो आप। और जब बात क्रिकेट की हो तो इसमें अलग के लोगो को क्यों लाना, ऐसे तो हमारे पास एक महिला क्रिकेट टीम भी है जिसमे से हिन्दुस्तान की जनता ने सिर्फ दो ही नाम सुने है मिताली राज और झूलन देवी कुछ ने तो शायद वो भी नही सुने होंगे……… खैर!!!! उनके अलाव उस टीम में 9 खिलाडी और भी है जिन्हें कोई नही जानता तो उनसे जुड़े मर्दों पर कोई निशाना क्यों नही साधता……
ऐसे हालातो में 2 रहस्यों से पर्दा उठता है पहला “हिन्दुस्तानी औरते बहुत खुशनसीबी से बदनसीब है”
दूसरा” हमारे पुरुष खुद कुछ नही कर सकते क्योंकि सब औरतो के नसीब का खेल है”
मर्ज़ी आपकी इसे जैसे देखना चाहे देख सकते है।

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