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इस भाषा को मान्यता दिलाने के लिए 500 से अधिक ने रख लिया उपवास

बीकानेर। राजस्थानी मान्यता आंदोलन के प्रवर्तक कवि-कथाकार कमल रंगा के नेतृत्व में ५00जनों ने राजस्थानी भाषा को मान्यता मिले इसके लिए गुरुवार को उपवास रखा। रंगा ने बताया कि बीकानेर में 21 जनों, देश के 13 राज्यों, प्रदेश के 16 जिलों में राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए लगभग 500 से अधिक लोगों ने उपवास रखा। रंगा ने बताया कि यह प्रथम प्रयास है कि व्यक्तिगत निवेदन और अल्प समय सूचना के बावजूद इतना समर्थन मिला है।

रंगा ने बताया कि राजस्थानी भाषा, भारतीय भाषा परिवार की समृद्ध एवं वैभवशाली भाषा है। साथ ही वह करोड़ों लोगों की अस्मिता और जनभावना से जुड़ा हुआ सवाल है। अत: केन्द्र सरकार को अब इसे शीघ्र संवैधानिक मान्यता दे देनी चाहिए, ताकि यह भाषा राजस्थान में रोटी रोजी की भाषा बन सके। यह ही केन्द्रीय भाव एवं आत्मिक भावना बीकानेर की धरा से पूरे प्रदेश एव देश के अनेक राज्यों में सृजनशील कवि-शायर, सम्पादक, एंकर, चित्रकार, व्यापारी, उद्योगपति छात्र, मजदूर, गृहणी, समाजसेवी, खेलजगत आदि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने राजस्थानी के पक्ष में अपना सर्मथन करते हुए गुरुवार को इसी बाबत सामूहिक उपवास रख केन्द्र सरकार को अहिंसात्मक तरीके से राजस्थानी की मान्यता हेतु मौन संकेत दिया है कि अब सरकार राजस्थानी को उसका हक शीघ्र दें। कमल रंगा ने बताया कि प्रज्ञालय एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा गत 40 वर्षों से चलाए जा रहे राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता एवं प्रदेश दूसरी राजभाषा बनाने के अहिंसात्मक आंदोलन की निरन्तरता में संस्था के अनुरोध पर डॉ. नरेश कुमार ‘सागरÓ हापुड़ (यू.पी.) नीरज सिन्हा यू.पी अवनेश ‘कबीरÓ चौहान-सम्भल, खलीक अहमद खां-फैजाबाद, डॉ. अर्पण जैन ‘अविरलÓ-इंदौर कैलाश सोनी Óसार्थकÓ (म.प्र.) ललिता बी जोगड़ मुंबई टिकेश्वर सिन्हा-बालोद (छतीसगढ़), सुरेश रायपुर, किशोर श्रीवास्तव, शशि श्रीवास्तव दिल्ली, विपनेश माथुर न्यूज एंकर इंडिया न्यूज नई दिल्ली, सागर सूद-पटियाला पंजाब, महशर अजनबी गुडग़ांव, सुनिता सिंह-बहादुगढ़, हरियाणा, अनिल भदौही, जोधराज जी व्यास, घनश्याम, डॉ. प्रियंका, डॉ. विनय, डॉ. बिजया, अरूण व्यास, इला, मुम्बई, नरेन्द्र, सोहन मोहता सूरत गुजरात, बसंत दम्माणी, श्वेता रमेश टिक्की- कोलकत्ता-पं. बंगाल आनन्द कुमार प्रेम प्रकाश विशाल, श्यामसुन्दर, शोभा, विमला-रांची, झारखंड प्रेमप्रकाश भुवनेश्वर उडि़सा, भगवानदास गुहा, रायपुर रामशर्मा जबलपुर, दीपक मासूम कुरूक्षेत्र, कमल कुमार व्यास मंडी, अर्चना त्रिपाठी बिहार, दीक्षा सविता-हरदोई (उप्र) के साथ प्रदेश डॉ रघुनाथ मिश्र, कपिल खण्डेलवाल-कोटा, देव शर्मा, नकुल गोयल जयपुर कृष्ण कुमार सैनी- दोसा, सलमान सिकन्दरबादी, दिनेश तूफानी-सिकन्दरा, अब्दुल समदराही-सोजत-पाली नरेश कुमार सेवक सनातन उदयपुर, रक्षितपरमार-झुंझनू कपिल पालि या ‘सूफीÓ सुमित श्रीमती निकिता-अजमेर, सुधेश-ब्यावर, बुलाकीदास, राजसंमद, नरेन्द्र आचार्य उदयपुर, अनिल अनवर, मृदुला श्रीवास्तव, तारा प्रजापत प्रीत, राकेश पीहार-जोधपुर, राहुल-चुरू, इरफान नौमानी, जावेद जानशी-नागौर, महमूद हमसर, शम्मी शम्स वारसी आबू रोड, रामगोपाल राही-बूंदी सयद साबिर हसन ‘रईसÓ अशोक सक्सेना टोंक इसी तरह प्रतीकात्मक रूप से बीकानेर से 21 राजस्थानी समर्थकों ने इस संदर्भ में उपवास रखा वो है लक्ष्मीनारायण रंगा कासिम बीकानेरी, कमल रंगा, शिवशंकर भादाणी, मधुरिमा सिंह, अरविन्द ऊभा, मुखत्यार अली, मुनेन्द्र अग्निहोत्री, घनश्याम सिंह, माजिद खान गौरी, हरिनारायण आचार्य शहबाज खान, पुखराज सोलंकी, मुराद, शमशेर, कार्तिक मोदी, चम्पालाल, प्रशांत जैन, श्यामसुन्दर, हटिला, उस्मान हारून एवं एडवोकेट राजेश गुप्ता इन सभी उपवास धारकों ने एक साथ में अपनी भाषा-भावना, अस्मिता और पहचान की पीड़ा को मौन स्वर प्रदान कर केन्द्र सरकार की इस ओर शीघ्र निर्णय की आशा रखी है।
कासिम बीकानेरी ने बताया कि संस्था द्वारा चलाए जा रहे इस अहिंसात्मक आंदोलन में पहली बार एक नवाचार कर नगर प्रदेश एवं देश के विभिन्न कलाधर्मियों एवं विभिन्न भाषा के साहित्यकारों, शायरों, आदि ने अपने-अपने स्तर पर उपवास रख राजस्थानी मान्यता को समर्थन देना महत्वपूर्ण है। केन्द्र सरकार अब इस बाबत चालू सत्र में निर्णय ले।

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