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रिपोर्ट: भ्रष्टाचार के अधिकांश मामलों की फाइलें बंद

 

रिपोर्ट: भ्रष्टाचार के अधिकांश मामलों की फाइलें बंद

जोधपुर। महानरेगा में भ्रष्टाचार की परते एक-एक करके पूरे ही सूबे में खुलने लगी हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में गत चार सालों का खुलासा हुआ है, जिसमें वर्ष 2010 से 2014 तक पुलिस में 817 एफआईआर दर्ज हुई है उसमें से केवल 252 में ही गिरफ्तारी हुई है। कर्मचारियों के विरूद्ध 278 मामले भ्रष्टाचार के पाए गए हैं, इन सभी के विरूद्ध पुलिस में मामले दर्ज करवाए गए है। मिली जानकारी के अनुसार भ्रष्टाचार में 179 जनप्रतिनिधियों के विरूद्ध भी मामले दर्ज है। जबकि 360 अन्य जिसमें ठेकेदार भी शामिल है के विरूद्ध वसूली की तैयारी की जा रही है। गत वर्ष 2014 में 9.25 करोड़ की अनियमितताएं पाई गई थीं। हालत ये है कि मनरेगा में अव्वल रहने वाले राजस्थान को शील्ड मिलने के बाद अब उसमें सर्वाधिक भ्रष्टाचार पनपा है। यही वजह है कि 2011-12 में 100 दिन पूरे करने वालों की संख्या 2 लाख 75 हजार थी जो दिसम्बर 2014 में घटकर 99 हजार रह गई। उस समय 94 लाख जॉब कार्डधारी थे जिसमें से 32 लाख ही बचे रह गए। राजस्थान में सामाजिक अंकेक्षण की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। नौ करोड़ के घोटाले, वसूली सिर्फ 1.40 करोड़ राजस्थान के नौ जिलों में ग्राम पंचायतों से 9.25 करोड़ के घोटाले निकले हैं। उसके बदले 1.40 करोड़ की ही वसूली हो पाई है। जोधपुर में भी ऐसे घोटले तो हुए है लेकिन वसूली की जगह कार्रवाई करके फाइल बंद कर दी गई।

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