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लोकतंत्र एवं मानवीय मूल्यों पर मंथन के साथ काव्य पाठ

बीकानेर। कादम्बिनी क्लब द्वारा आज स्थानीय मरुधर हेरिटेज के विनायक सभागार में “लोकतंत्र एवं मानवता” विषय पर एक विचार गोष्ठी  और काव्य पाठ का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रकट करते हुए उर्दू और हिंदी के साहित्यकार डॉ. जियाउलहसन कादरी ने लोकतंत्र और मानवता की रक्षा के लिए हजऱत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने जिन्दगी भर मानवता के मूल भूत सिद्धांतों  का अक्षरश: पालन करते हुए शहीद हो गए । डॉ.जिया ने कहा के हुसैन लोकतांत्रिक मूल्यों के सच्चे संवाहक थे, वे हिदुस्तान में आकर बसना चाहते थे, हुसैन की शहादत का बदला लेने के लिए हुसैनी ब्राह्मणों के एक दल ने युद्ध भी किया था । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद श्री मोहनलाल जांगिड ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य मानवता के सरंक्षक है तथा भारतीय लोकतंत्र की पहचान “विविधता में एकता” के रुप में विख्यात है ।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में क्लब के संयोजक और अध्यक्ष डॉ.अजय जोशी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि मानव जाति के कल्याण और सुरक्षा के लिए लोकतंत्र का कोई विकल्प नही है । लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने में हजरत इमाम हुसैन की शहादत को दुनिया भर में  याद किया जाता है । क्लब के सह संयोजक डॉ.नरसिंह बिन्नाणी ने कहा कि सांस्कृतिक समरसता ही इस देश की पहचान है जिसकी हर कीमत पर रक्षा की जानी चाहिए । इस अवसर पर लेखिका और कवयित्री डॉ. रेणुका व्यास ने अपने गीत के माध्यम से मानव जीवन के महत्व को रेखांकित किया । कवि कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने अपनी हिंदी गजल “जिन्दगी के मर्म को अब तक समझ पाया नहीं, आधा जीवन जी लिया पर हाथ कुछ आया नहीं” एक राजस्थानी गजल “पूनम री रात अर मीठी-मीठी बात, ठाÓई कोनी पड्यौ कद होयौ परभात” सुनाकर मानवता के विभिन्न पहलूओं को व्यक्त किया । युवा कवि-कथाकर पुखराज सोलंकी ने अपनी गज़़ल “कभी लिखा तो कभी मिटाया गया” के माध्यम से मानव जीवन की त्रासदी को प्रकट किया । शायर अब्दुल ज़ब्बार ने मानव जीवन  में माँ की महता को अपनी शायरी “भीगा भीगा माँ का आँचल” के माध्यम से प्रकट किया । हास्य कवि बाबूलाल छंगाणी ने व्यंग्य गीत “सहर में गोधा” प्रस्तुत करके तालियां बटोरी । डॉ. प्रकाशचन्द्र वर्मा, श्रीमती कृष्णा वर्मा, शिवशंकर शर्मा, गिरिराज पारीक, डॉ.रुचिरा भार्गव, शायर असद अली ‘असदÓ, हाफिज फरमान अली, अनीष रहमान, मुरली मनोहर के.माथुर, प्रेमनारायण व्यास, समाजसेवी हेमचंद बांठिया, दीपेन्द्र स्वामी आदि ने अपने उद्बोधन और काव्य पाठ के माध्यम से लोकतंत्र और मानवता के विविध आयामों की चर्चा की । कार्यक्रम का संचालन डॉ.रेणुका व्यास “नीलम” ने किया । संस्था की तरफ से प्रख्यात चित्रकार मुरलीमनोहर के.माथुर ने आभार ज्ञापित किया ।(PB)

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