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भारत की जनसंख्या 1अरब 27 करोड़, 42 लाख, 39 हजार 769 दर्ज

भारत की जनसंख्या 1अरब 27 करोड़, 42 लाख, 39 हजार 769 दर्ज

नई दिल्ली। भारत की जनसंख्या 1.6 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रही है और 2050 तक देश दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन सकता है। भारत की जनसंख्या शनिवार को एक अरब 27 करोड़, 42 लाख, 39 हजार 769 दर्ज की गई।  यह विश्व की आबादी का 17.25 फीसदी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाले जनसंख्या स्थिरता कोष (NPSF) ने अधिक जनसंख्या से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई।

भारत की जनसंख्या के चीन की आबादी की तुलना में तेजी से बढ़ने पर गौर करते हुए कोष के एक अधिकारी ने कहा कि देश 2050 तक दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाला देश हो सकता है। चीन की आबादी फिलहाल 1.39 अरब है और यह दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाला देश है। अधिकारी ने कहा कि अगर मौजूदा दर बरकरार रहता है तो भारत की आबादी 2050 तक 1.63 अरब होगी और चीन की आबादी को पार कर जाएगी। एक कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य को हासिल करने में सरकार की सहायता के लिए एनजीओ को शामिल करने पर जोर दिया।

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली और केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंदर सिंह ने दिल्ली में यह डाटा जारी किया। देश के सिर्फ  4.6 प्रतिशत ग्रामीण परिवार आयकर देते हैं, जबकि वेतनभोगी ग्रामीण परिवारों की संख्या 10 प्रतिशत है।

यह जानकारी शुक्रवार को पिछले आठ दशक में पहली बार जारी आर्थिक एवं सामाजिक जाति जनगणना में दी गई। सामाजिक आर्थिक एवं जातिगत जनगणना 2011 में कहा गया कि आयकर देने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों की संख्या 3.49 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति के ऐसे परिवारों की संख्या मात्र 3.34 प्रतिशत है।  इस मौके पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि आर्थिक, सामाजिक एवं जातिगत जनगणना से घरेलू विकास का बेहतर डाटा मिलेगा। इससे सरकार को लोगों को लेकर नीतियां बनाने में आसानी होगी। जनगणना की मदद से गरीबी के कारणों की पहचान करने के बाद सरकार राष्ट्रीय आवास योजना, मनरेगा और इंदिरा आवास योजना जैसी योजनाओं को इस समस्या

का सामना करने के लिए इस्तेमाल करेगी। ग्रामीण विकास मंत्री बीरेंदर सिंह ने कहा कि इस जनगणना के जरिए हमारे पास ग्रामीण परिवारों को लेकर विश्वसनीय डाटा होगा। हम एक विशाल विकास परिवर्तन की ओर हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार हर तीन में से एक ग्रामीण परिवार के पास कमाई का अनिश्चित जरिया है और एक कमरे के कच्चे घर में रहने को बाध्य हैं। 1932 के बाद पहली बार इस तरह की जनगणना की गई है और इसके तहत 24.39 करोड़ परिवारों से जानकारी ली गई है।

गौरतलब है कि 1932 के बाद यह पहली जनगणना है जिसमें क्षेत्र विशेष, समुदाय, जाति एवं आर्थिक समूह संबंधी विभिन्न किस्म के ब्योरे हैं और भारत में परिवारों की प्रगति का आकलन किया गया है।

जनगणना की कुछ खास बातें

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