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संगीत के सुर साधकों ने सुर बिखेरे

बीकानेर । विरासत संवर्धन संस्थान के तत्वावधान में साधनारत कलाकारों की रचनात्मक प्रस्तुति हेतु समर्पित श्री संगीत कला केन्द्र नई लाईनए करनाणी मोहल्ला गंगाशहर में संगीत साधकों ने एक से बढकर एक लाजबाब संगीत की प्रस्तुतियां दी । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संगीत भारती के निदेशक डॉण्मुरारी शर्मा ने कहा कि साधनारत कलाकारों ने बहुत अच्छी प्रस्तुतियां देकर बीकानेर में संगीत का नाम बढा रहे हैं । शरमा ने कहा कि तन्मय होकर जो सीखा जाए वह विध्या जल्दी आत्मसात होती है ।

विशिष्ठ अतिथि गौरीशंकर सारडा ने कहा पारम्परिक गायन में सुर.लय.ताल अपना विशेष महत्व रखते हैं। लय और सुर ही जीवन है । विशिष्ठ अतिथि कवि.कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि नए संगीत साधकों को गाने से पहले रागों का ज्ञान अति आवश्यक है । पुखराज शर्मा जो स्वयं संगीत को समर्पित सख्शियत है उनके निर्देशन में आयोजित यह संगीत सभा संगीत साधकों को अच्छा ज्ञान दे रही है । कार्यक्रम में मोईन खां ने फगवा बृज देखन को चलो री बसंत, राग झिंझोटी में दाता तुम हो जग करतारय तालद्ध विलोक्ती ।

आज मन बस गई खयाल तीन ताल, शालू ने सुपनो, भारती जोशी ने घाटी रो नगारो और ज्योति कलश छलकेए लता मलघट ने गजल. अन्धेरे ख्वाबों को उसूलों का चिराग मिल जाएए सुनीता स्वामी ने हरि दर्शन की प्यासीए उर्मिला ने मोसम आएंगे जाएंगे हम तुमको भूल न पाएंगेए प्रिया खत्री ने आओनी म्हारै हिवडै रा पावणा,सरोजकुमारी ने दळ बादळ में चमकै जी तारा, मुकेश ने म्हारी सजनी, आज तो नेणा रो लोभी आसी, बजरंगलाल ने होरी खेले कृष्ण कन्हाई, ओमप्रकाश ने गजल. सबको दुश्मन बना लिया मैनेए गोपाल, मनीष, कमल, किरण सेन, मधु तिवारी, मानसी तिवारी आदि ने एक से बढकर एक गीत, गजल सुनाकर तलियां बटोरी । तबले पर गुलाम हुसैन, तारिक हुसैन हारमोनियम पर पुखराज शर्मा, पिंटू स्वामी ने संगत की । कार्यक्रम के अंत में संस्था की तरफ से डालचन्द सेवग ने आभार व्यक्त किया ।

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