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अपराधिक कानूनों में सुधार हेतु वेबीनार का आयोजन

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OmExpress News / Bikaner / ज्ञान विधि पी.जी. महाविद्यालय, बीकानेर एवं अभिवक्ता परिषद राजस्थान हाई कोर्ट, जयपुर, शिक्षा संस्कृति न्यास, नई दिल्ली, वर्दा फाऊडेशन, जयपुर के संयुक्त तत्वाधान में एक वेबीनार का आयोजन किया गया वेबीनार में विशेषज्ञ परामर्श दाता के रूप में माननीय श्री एम.एन. भण्डारी न्यायाधीश इलाहाबाद हाई कोर्ट, मनोज भटट पूर्व डी.जी. पुलिस राजस्थान, जी.एस. गिल पूर्व ए.ए.जी. राजस्थान राज्य, श्री अरूण भारद्वाज एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट तथा डाॅ. बी.एल. बिश्नोई, प्राचार्य, ज्ञान विधि पी.जी. महाविद्यालय, बीकानेर उपस्थित थे। (Gyan Vidhi PG College Bikaner)

वर्तमान युग में पुलिस को अनुसंधान में नई तकनीकी का प्रयोग करना अत्यन्त आवश्यक : भटट

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री एम.एन. भण्डारी न्यायाधीश इलाहाबाद हाई कोर्ट ने समिति द्वारा सुझाई गई प्रष्नावलियों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला और साथ ही पीड़ित को देने वाले प्रतिकर में सुधार की आवश्यकता बतलाई तथा छात्रों द्वारा पूछे गये प्रश्नों का जवाब देकर उनकी जिज्ञासा शान्त की। मनोज भटट पूर्व डी.जी. पुलिस राजस्थान जयपुर ने कहा कि वर्तमान युग में पुलिस को अनुसंधान में नई तकनीकी का प्रयोग करना अत्यन्त आवश्यक है और इसके अभाव में ही कभी अपराधियों को सजा नहीं मिल पाती है।

जी.एस. गिल पूर्व ए.ए.जी. राजस्थान ने वर्तमान परिदृश्य में अपराधिक कानूनों में दी गई व्यस्कता की आयु को कम करने का सु-हजयाव दिया। श्री अरूण भारद्वाज एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय में अपनाई जाने वाली भाषा पर प्रकाश डालते हुये कहा कि न्यायालय को स्थानीय भाषा का प्रयोग करना चाहिए, और इसके अभाव में गवाहों द्वारा दिये गये बयान के अनुवाद में कई बार अर्थ का अनर्थ हो जाता है। यदि हम भारत में प्रचलित सभी भाषाओं को नही अपना सकते तो कम से कम उच्च न्यायालयों एवं उच्चतम न्यायालय में हिन्दी भाषा को व्यापक रूप से अपना सकते है।

न्यायालय में गवाही देने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकारों को उठानी चाहिये : बिश्नोई

डाॅ. बी.एल. बिश्नोई, प्राचार्य, ज्ञान विधि पी.जी. महाविद्यालय, बीकानेर ने अपने उद्बोधन में कहा कि न्यायालय में गवाही देने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकारों को उठानी चाहिये। असुरक्षा की भावना से गवाह अपराधी के खिलाफ गवाही देने से घबराते है और इसी कारण से विकास दुबे जैसे अपराधी पनपते है। साथ ही उन्होने पुलिस अनुसंधान में सुधार पर बल दिया।

ज्ञान विधि पी.जी. महाविद्यालय का संक्ष्पित परिचय देते हुऐ उन्होन सभी अतिथियों एवं श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। समन्यवक श्री दुर्गा प्रसाद अग्रवाल, एडवोकेट विनोद गुप्ता, एडवोकेट एस.पी.एस राजावत ने भी अतिथियों व श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। छात्र आशीष कुमार खत्री, अभिषेक कड़वासरा, कुलदीप बिश्नोई, हरीश सोलंकी, गुलेराना आदि ने भी अपराधिक कानूनों में सुधार के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किये।

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