बीकानेर /अन्याय को देखकर चुप रहने वाला भी उस पाप का उतना ही भागी है जितना अन्याय करने वाला होता है। इसलिए अन्याय को सहन नहीं करना चाहिए, उसका विरोध करना चाहिए और अगर विरोध ना कर सको तो अन्याय होते हुए भी नहीं देखना चाहिए। यह आदर्श बात क्षमारामजी महाराज ने गुरुवार को श्रीमद् भागवत कथा एवं ज्ञानयज्ञ का वाचन करते हुए कही। क्षमारामजी महाराज श्रीगोपेश्वर महादेव मंदिर मैदान में पितृपक्ष अवसर पर चल रही पन्द्रह दिवसीय कथा में कथावाचन कर रहे हैं।

कथा का आज 13 वां दिन रहा। आज की कथा में क्षमाराम जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण, बलरामजी का ब्रजवासियों के मथुरा जाना और वहां पर कंश द्वारा आयोजित की गई रंगशाला में भाग लेना तथा कंश के वध करने का प्रसंग विस्तार पूर्वक बताया। कथा में श्रीकृष्ण और बलराम जी का मथुरा में भ्रमण करना, धोबी को मुक्ति देना, कुरुपा को सौन्दर्य प्रदान करना एवं धनुष को तोडऩे सहित पुबलया हाथी को मार गिराने सहित अन्य प्रसंगो की विवेचना की।

श्रीमद् भागवत कथा समिति के गोपाल अग्रवाल ने बताया कि बुधवार की कथा में पांच महिलाओं के गले से चैन स्नैचर चैन तोड़ ले गए। उक्त महिलाऐं अपनी व्यथा लेकर आयोजनकर्ताओं के पास पहुंची और आपबीती बताई। इस पर गुरुवार को कथा विश्राम के दौरान संत रामपालजी महाराज ने सभी महिलाओं से आग्रह किया कि वे अपने कीमती सामान का ध्यान रखें। कुछ लोग आप को भक्ति भाव में डूबे देख आपके आभूषणों पर हाथ साफ कर रहे हैं। इसलिए सावधानी पूर्वक रहें।