नई दिल्ली,(ओम एक्सप्रेस)। शाहजहाँपुर-खेड़ा बॉर्डर पर 29 मई शनिवार को 167 वें दिन भी किसानों का आंदोलन जारी रहा। किसान-नेता चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी गई। वहीं भयानक आंधी और तूफान से उखड़े तम्बू, कई किसान घायल भी हुए।मोर्चे पर सभी तम्बुओं क सैनेटाइज किया गया। शाहजहाँपुर-खेड़ा बॉर्डर पर समूह चर्चाओं में किसानों के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले, किसान-नेता , स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए किसानों द्वारा श्रद्धांजलि दी गई। संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में किसानों ने आंदोलन को तेज करने की बात करते हुए कहा कि पिछले साल 5 जून को इस कानून का अध्यादेश आया था। ऐसे में किसान उस दिन भाजपा सांसद और विधायकों के घरों के पास हुंकार भरेंगे। किसान उस दिन कृषि कानून की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज करेंगे। शाहजहाँपुर-खेडा बॉर्डर पर तीनो काले कृषि बिल और पीडीएस एवं खाद्य सुरक्षा पर समूह चर्चा में भाग लेते हुए किसानों ने कहा कि सीमित आय और संसाधनों के बिना अधिकांश गरीब किसान व मजदूरों का जीवन सरकार की सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर है। इनमें से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) सबसे महत्वपूर्ण योजना है।

देशी-विदेशी पूंजीपतियों को फायदा पहुँचाने वाली नवउदारवादी आर्थिक नीतियों को लागू करने के बाद से पीडीएस सहित अन्य सामाजिक कल्याण की योजनाओं के दायरे को लगातार कम किया जा रहा है। पिछ्ले 25 वर्षों के अनुभव से हमे पता चलता है कि नवउदारवादी नीतियों से जनसाधारण पर घातक प्रभाव पड़ा है, खासकर ग्रामीण किसान और गरीब मजदूरों पर। सार्वभौमिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पहले ही एक लक्षित कार्यक्रम में बदल दिया गया है, जिसका अर्थ है कि लाखों परिवारों को सरकारी सहायता से दूर कर दिया गया है। पूंजीपतियों और कॉरपोरेट की दलाल भाजपा-आरएसएस की अगुवाई वाली केंद्र सरकार और उनके आईटी तंत्र के लंबे दावों के बावजूद संघर्षरत किसान और जनता इस बात को बेहतर जानते है कि भविष्य में इन तीनों काले कृषि कानूनों का खाद्यान्नों की खरीद पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सरकारी मंडियों की (एपीएमसी अधिनियम के कमजोर पड़ने पर) गैरमौजूदगी में निजी खरीद को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी खरीद में कमी आएगी जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा है। ये सीधे पीडीएस को भी प्रभावित करता है। सरकार द्वारा कम खरीद किए जाने पर सरकारी गोदामों में खाद्यान्न की उपलब्धता कम हो जाएगी। इन हालात में, पीडीएस में खाद्यान्न की कमी हो जाएगी और खाद्यान्न के बदले नकद (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से) की वकालत तेज हो जाएगी। जिससे धीरे-धीरे सार्वजनिक वितरण प्रणाली बंद हो जाएगी। पीडीएस ग्रामीण किसानों और गरीबों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सस्ती कीमतों पर और आपातकालीन स्थितियों में अनाज वितरण और प्रबंधन की बेहतरीन प्रणाली है। तमाम कमजोरियों के बावजूद भारत मे वर्षों से पीडीएस, ‘खाद्य सुरक्षा’ का पर्याय बन गया है। कमजोर पीडीएस प्रणाली और खाद्यान्न की जगह नकद हस्तांतरण हमारे देश के लिए आपदा बन सकती है, जहाँ हर चौथा बच्चा कुपोषित है और प्रजनन आयु की उम्र की सभी महिलाओं में खून की कमी है। इन तीनो काले कानूनों के लागू होने से पीडीएस की प्रकृति हमेशा के लिए बदल जाएगी, जिससे भारत आज की तुलना में अधिक कुपोषित हो जाएगा। अतः अपनी किसानी और देश की जनता के अधिकारों को बचाने के लिए हम एकजुट होकर इस निरंकुश कुशासित केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष करते रहेंगे।एक बार भयानक आंधी और तूफान से मोर्चे पर भारी नुकसान हुआ है। सारे तम्बू या तो उखड़ गये हैं अथवा अस्त-व्यस्त हो गये हैं । आंधी और तूफान में कई किसान घायल हो गये हैं और उन्हें चोटें आयी है जिन्हें चिकित्सा के लिए निकटवर्ती अस्पताल में ले जा कर उपचार कराया गया है।