– आखिर पुलिस प्रशासन है किसके साथ……???

; रिहायशी क्षेत्र में निगम की जमीन पर संचालित अवैध वर्कशॉप को गत 25 वर्षों में प्रशासन हटाने में फेल

जोधपुर,(दिनेश शर्मा”अधिकारी”) । मुख्यमंत्री के चुनावी क्षेत्र में सरदारपुरा- चौपासनी रोड पर रिहायशी इलाके के 80 फुट मेन रोड पर स्थानीय प्रशासन के सहयोग और सुविधा शुल्क की ताकत से पब्लिक न्यूसेंस और प्राइवेट न्यूसेंस की परवाह न करते हुए ,वायु प्रदूषण-ध्वनि प्रदूषण के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए, राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, फैक्ट्री अधिनियम, भू राजस्व अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए सरकारी जमीन पर खौफ और बेरोकटोक संचालित इस अवैध वर्कशॉप को विगत 25 वर्षों से आज दिनांक तक कोई हटा नहीं पाया है । साथ ही आज तक स्थानीय पुलिस प्रशासन का कोई भी आदमी अधिकारी नियमों के विरुद्ध होने के बावजूद भी आज तक हाथ नहीं डाल पाया है स्थानीय निवासियों ने बताया की गत 25 वर्षों में स्थानीय प्रशासन पुलिस कमिश्नरेट से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय ,विधानसभा और जन संपर्क पोर्टल पर शिकायत होने के बावजूद भी आज दिनांक तक इस अवैध वर्कशॉप को सरकार नहीं हटा पाई है । मौके की वस्तुस्थिति यह है कि स्थानीय प्रशासन ने वर्ष 1997 में ऑटोमोबाइल मार्केट को इस रिहायशी इलाके से शहर से बाहर आकलिया चौराहे से आगे शिफ्ट कर दिया था, पूरा ऑटोमोबाइल मार्केट वहां शिफ्ट हो चुका है लेकिन यह अवैध वर्कशॉप सरकार की जमीन पर आज भी 25 वर्षों से संचालित है, जिसके पास अपना कोई पार्किंग स्थल तक भी नहीं है जो गाड़ी ठीक करने के लिए ट्रैफिक नियमों को तोड़ते हुए सड़क पर ही ठीक करता है। इस अवैध वर्कशॉप संचालन कर्ता के पास किसी कंपनी का ऑथराइजेशन प्रमाण भी नहीं है लेकिन फिर भी सिटी बस -स्कूली बसें निर्विवाद रूप से यहां सरकारी जगह पर ठीक कर रहा है । इसी पार्किंग स्थल पर बिजली विभाग का ट्रांसफार्मर भी स्थित है जिस पर नंगे झूलते तार के पास खड़ी सिटी बसें किसी भी समय आगजनी जैसी बड़ी दुर्घटना को कभी भी अंजाम दे सकती है । वर्कशॉप धारक के पास ऐसी दुर्घटनाओं से निपटने के लिए कोई अग्निशामक यंत्र जैसा उपकरण भी नहीं है, जो समय बे समय अगर कोई दुर्घटना हो जाए तो इसी इलाके में होने वाली किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके । स्थानीय रिहायशी लोगों ने बताया कि पुलिस प्रशासन के पास अनेक बार हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन भी गत 25 वर्षों में व्यक्तिश: उपस्थिति के साथ दीया जा चुका है, लेकिन स्थानीय प्रशासन पर ऐसा कौन सा राजनीतिक दबाव आता है कि वह स्थानीय लोगों को ही समझाइश कर चले जाते हैं और शिकायत को कार्यालय में बैठकर खानापूर्ति कर देते हैं। उन्होंने बताया कि दिनभर वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण से आसपास के मकानों की स्थिति यह है कि उनकी दीवारों के पेंट 6 से 7 फुट के तक काली धुआं के रूप में जम चुका है, पेंट कराने के बाद भी वह वापस काली परत का रूप ले लेता है। इन समस्याओं से जूझने के बाद शाम को दिन ढलते ही यह सरकारी जमीन और अवैध वर्कशॉप ओपन बार के रूप में तब्दील हो जाती है जिसमें ड्राइवर-कंडक्टर,मैकेनिक-हेल्पर और साथ में शामिल हो जाते हैं असामाजिक तत्व जिनको छुपने के लिए ऐसी सुरक्षित जगह गाड़ियों की आड़ में मिल जाती है और यहां चलता है देर रात तक शराब के साथ गाली- गलौज धक्का-मुक्की ,आपसी झगड़े का तांडव जो रिहायशी इलाके को नर्क गामी बना देते हैं । यदि प्रशासनिक आदेश को द्विभाषी माना जाए तो यह सोचने का विषय है कि स्थानीय प्रशासन इस अवैध वर्कशॉप संचालक के साथ है या रिहायशी लोगों के साथ…! क्योंकि पुलिस प्रशासन का तो नारा है भयमुक्त वातावरण आमजन के लिए और अपराधियों में भय । अब यह समझ से बाहर का विषय है विगत 25 वर्षों से प्रशासन की कथनी और करनी में इतना फर्क । प्रशासन आखिर है किसके साथ है…….???