” केंद्र सरकार निरन्तर चल आ रही योजना को त्यौहार की तरह पेश कर छवि चमकाने की कोशिश कर रही है ” : मोर्चा

गुरुग्राम,हरियाणा।( दिनेश शर्मा “अधिकारी”)। राजस्थान दिल्ली बॉर्डर पर शाहजहाँपुर-खेड़ा में 15 मई शनिवार को 153 वें दिन भी जारी रहा आंदोलन। 15 मई, शनिवार को आंदोलन के 153 वे दिन किसान नेता चौधरी बाबा महेंद्र सिंह टिकैत को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए संयुक्त मोर्चा के सभी धर्मों के किसानों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए गये।किसान सम्मान योजना किसानों का अपमान है सम्मान नहीं ,MSP की कानूनी गारंटी होगा असल सम्मान। समूह चर्चाओं में सभी किसानों ने भाग लिया। आज किसानों के नेता चौधरी बाबा महेंद्र सिंह टिकैत जी की पुण्यतिथि पर किसानों ने शाहजहाँपुर-खेडा बॉर्डर पर उन्हें याद किया और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत आज भी किसानों व किसान आंदोलन के लिए प्रेरणा और ऊर्जा का स्त्रोत बने हुए है।

प्रधानमंत्री ने PM किसान सम्मान योजना की 8 वीं क़िस्त जारी की। यह अफसोसजनक है कि एक निरन्तर चल रही योजना को बार बार त्यौहार की तरह मीडिया में पेश किया जाता है सिर्फ छवि चमकाने की कोशिश की जाती है। एक तरफ जहां 450 के करीब किसानों की इस आंदोलन के दौरान मौत हो गयी है व किसान लगभग 60महीनों से सड़कों पर समय गुजार रहे है, उस समय सरकार सिर्फ कुछ पैसे की क़िस्त भेज कर किसानों का सम्मान करने का दिखावा कर रही है, हम इसकी कड़ी निंदा करते है। इसलिए सयुंक्त किसान मोर्चा इसे किसान सम्मान की बजाय किसानों के अपमान की तरह देखता है। किसानों का असली सम्मान तभी होगा जब सभी फसलों पर सभी किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफरिशों के अनुसार C2+50% फार्मूला पर MSP की कानूनी गारन्टी मिलेगी व सही समय पर फसलों की खरीद होगी। वर्तमान में पूरे देश के किसानो की सबसे बड़ी सार्वभौमिक आवश्यकता न्यूनतम समर्थन मूल्य है जो वे अपनी फसलों पर चाहते है। किसान पूरी मेहनत करके भी अपनी फसलों के भाव नहीं ले पाते है। कल अपने भाषण में प्रधनमंत्री ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले गेहूं की MSP पर खरीद इस साल 10% ज्यादा हुई है। सरकार न तो कभी जनता को आश्वस्त कर पाई है न ही किसान संगठनों के साथ बैठकों में समझा पाई है कि सभी किसानों को सभी फसलों पर MSP मिलेगा। जब सरकार यह कहती है कि MSP पर वर्तमान प्रणाली चलती रहेगी तो यही कहना चाहती है कि किसान MSP से वंचित रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कल के भाषण में सिर्फ गेहूं के MSP के बारे में बात की परंतु बाकी फसलों के भाव की लूट के बारे में चुप रहे। भाषण में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत मे दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज दिया जा रहा है। परन्तु सच यह है कि तीन कृषि कानूनो के लागू होने के बाद यह प्रणाली खतरे में पड़ जाएगी। खेती सेक्टर में कॉरपोरेट के प्रवेश होने व आवश्यक वस्तुओं पर स्टॉक लिमिट हटाने के बाद PDS सिस्टम भी बंद हो जाएगा व देश की अधिकांश गरीब जनता भुखमरी से मर जाएगी। सयुंक्त किसान मोर्चा का संघर्ष इन्हीं मुद्दों को लेकर है। यह बहुत निंदनीय है कि प्रधानमंत्री व कृषि मंत्री ने कल के कार्यक्रम में एक बार भी प्रदर्शनकारी किसानों का नाम नहीं लिया। पिछले साढ़े पांच महीनों से सड़को पर समय गुजार रहे किसानों से सरकार आत्मसम्मान छीन कर उन्हें बदनाम कर रही है। किसान को चरमपंथी, कट्टरपंथी व अन्य शब्दों का प्रयोग कर बदनाम किया गया है टेलीविजन पर किसान सम्मान शब्द का प्रयोग किया जा रहा है। हम इसकी कड़ी निंदा करते है। 22 जनवरी के बाद सरकार ने प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत नहीं कि है। कल के प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में भी सुनियोजित तरीको से पहले से तैयार बातचीत के फॉरमेट पर ही कुछ सरकार प्रायोजित किसानों से बातचीत की नौटंकी हुई। केन्द्र सरकार मीडिया में अपनी छवि को चमकाने की कोशिश करने के बजाय दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों से बातचीत करे तथा किसानों की मांगे मानकर किसानों की समस्या का समाधान करे।।

हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने एक बार फिर अपना किसान विरोधी चेहरा दिखाया है। अपने शासन व्यवस्था की नाकामी का ठीकरा किसानों पर फोड़ते हुए खट्टर ने कहा है कि किसानों की वजह से कोरोना फैला है।खट्टर के इस बयान का पूरे देश के किसान इसका विरोध करते है। हरियाणा सरकार किसानों के जज्बे व हौसलें को तोड़ना चाहती है जिसे किसी भी सूरत में किसान टूटने नहीं देंगें।