श्रीडूंगरगढ़।श्रीमती मुलीदेवी धर्मपत्नी स्व.श्री नेमीचंद जी दुगड़ श्रीडूंगरगढ़ निवासी कटक प्रवासी 91 वर्षीय ने 10 दिनों की तपस्या में 16 मई को परम श्रदेय आचार्य श्री महाश्रमणजी के आज्ञानुसार स्थानीय तेरापंथी सभा, महिला मण्डल, तेयुप एवं समाज के गणमान्यवरों की उपस्थिति में उपासक श्री पन्नालाल जी नाहटा द्वारा तैवीहार संथारा का प्रत्याख्यान किया।आपने समतामय साधना में लीन रहकर 18 मई रात्रि 8.37 बजे चित समाधि पूर्ण संथारा समपन्न किया। आपका अखण्डित परिवार में पुत्र श्री रतनलाल , इन्द्र चन्द (कटक धरा पर प्रथम संथारे में लीन तपस्वी)की अनुकरणीय सेवाओं से कटक वासी लाभान्वित होकर धन्यता की अनुभूति कर रहे है।।
कोरोना गाईडलाईन को ध्यान में रखते हुए आज प्रातः बैंकुंठी के द्वारा महाप्राण यात्रा में अनुशासन का परिचय दिया।

आपने श्रीडूंगरगढ़ से बीकानेर आवागमन करनेवाले साधु साध्वियों की सेवा में लखासर गांव स्थित मकान में संजोड़े रात्रि प्रवासकाल की सेवाओं में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई र और जीवन में अनेक तपस्याएं भी करते रहे।
इस समय श्रदेय आचार्य श्री महाश्रमणजी का व साध्वी प्रमुखा श्री कनकप्रभाजी का आध्यात्मिक यात्रा के उत्तरोत्तर विकास में संदेश प्राप्त हुआ।