

कुशीनगर जनपद में बिना मान्यता प्राप्त बिद्यालयों की भरमार,अधिकारी मौन
राधेश्याम शास्त्री
बरवापट्टी/दुदही,कुशीनगर
जनपद में बिना मान्यता के अप्रशिक्षित शिक्षकों के सहारे हाई स्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा को गारन्टी के साथ उत्तीण॔ कराने के साथ बच्चों का प्रवेश बिद्यालय में हो चुका है।शिक्षा का ब्यवसाय करने वाली बिद्यालय रूपी दुकानें अपना कारोबार शुरु कर चुकी है।
जुलाई आते ही शिक्षा से जुड़ी दुकानें तरह-तरह के मनमोहक ,बैनरों, पोस्टरों के साथ आकर्षित करने लगते हैं।जिले में हर शिक्षा सत्र में नये-नये विद्यालय खुल जाते हैं और बिना मान्यता तथा अप्रशिक्षित शिक्षकों के सहारे बच्चों को हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट की कक्षा कोअच्छे अंक से परीक्षा को उत्तीण॔ कराने तक की गारन्टी ले लिये जाते हैं।
जिले के दुदही विकास खण्ड क्षेत्र के स्थानीय दुदही बाजार,पड़रौन मड़ुरही,ठाढ़ीभार, बैकुंठपुर,बरवाबभनौली, जंगल नौगांवां, नरहवां अचरज दूबे,गोड़रिया, जंगल बिशुनपुरा गोंसाई पट्टी,मठिया माफी, जंगल सिसवां, बांसगांव, चौरिया, जमुआन, पुष्करनगर दशहवां,अमवाखास, रामपुर पट्टी, रामपुर बरहन, गौरी जगदीश,तिवारी पट्टी, गौरीश्रीराम, कतौरा,पृथ्बीपुर,मठियां भोकरियां, धर्मपुर पब॔त, गुरवलिया, कोरेयां, दोघरा, सहित जंगल लाला छपरा सहित पूरे जनपद में बिना मान्यता के ही शिक्षा का ब्यवसाय करने वाली विद्यालय रुपी दुकानें अपना कारोबार शुरु कर चुकी है।
मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कम सीटों के चलते प्रवेश की मारामारी का लाभ शिक्षा के ब्यवसाय से जुड़े धन्धेबाज शिक्षा माफिया उठा रहे हैं।जिसमें शिक्षित बेरोजगारों को नाममात्र कम वेतन देकर शिक्षा माफिया अपनी आय बढ़ाने के लिये गलाकाटा प्रतिस्पधा॔ में लगे हैं।
आलम यह है कि पास की गारण्टी वाले इन बिद्यालयों में पढ़ाई तो होती तो है,लेकिन उन छात्राओं का नामांकन मान्यता प्राप्त दूसरे बिद्यालय में होता है। इस धन्धे में ऐसे मान्यता प्राप्त बिद्यालयों मोटी रकम प्राप्त हो जाती है।
जहां बिना मान्यता प्राप्त छात्राओं से मोटी रकम लेकर नामंकित होने के साथ ही पढ़ाई की कोई गारण्टी नहीं होती है। वहीं दूसरे कागजों में छात्रों का छात्रबृत्ति भी सीधे प्रबन्ध तंत्र हजम कर जाता है। गैर मान्यता प्राप्त बिद्यालयों में शिक्षा की सुविधा का आलम यह है कि न तो इन बिद्यालयों के पास प्रयोगशाला और पुस्तकालय रहता है,फिर भी विज्ञान जैसे महत्वपूण॔ बिषयों की शिक्षा का दावा कर प्रवेश ले लिया जाता है। इन गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों के प्रबन्ध तंत्र व अन्य लोगों की सांठ-गांठ के साथ बिद्यालयों में पढ़ाकर नकल के लिये प्रसिद्ध केन्द्रों पर सेटिंगके साथ परीक्षा दिलाते हैं,और अच्छे डिवीजन और नम्बर से पास कराने की गारण्टी लेते हैं, लेकिन डिग्री लेकर निकलने वाले छात्र इस प्रतिस्पधा॔ के जमाने में कहां टिक सकते हैं,इस उन बिद्यालयों के प्रबन्ध तंत्र से कोई सरोकार नहीं रहता है।
मजेदार बात यह है कि जूनियर कक्षाओं की मान्यता के पात्रता के लिए कमरे आवश्यक हैं,जबकि मौके पर कटरैन व छप्पर हैं।
