अजमेर, 28 जुलाई, 2026: टाटा पावर ने शहर में अपने ‘ईज़ी होम ऑटोमेशन सॉल्यूशंस’ की शुरूआत की है। इसके ज़रिए अब यहाँ के परिवारों को ऐप से चलने वाली बेहद आसान और स्मार्ट होम टेक्नोलॉजी मिलेगी, जो बिजली बचाने में मदद करेगी।
टाटा पावर ईज़ी होम की मदद से लोग अपने फोन से ही घर के लाइट, पंखे, एसी और अन्य उपकरणों को कंट्रोल कर सकते हैं। इसके अलावा, एलेक्सा या गूगल असिस्टेंट की मदद से सिर्फ आवाज़ देकर (वॉयस कमांड से) भी इन्हें चलाया जा सकता है। इस सिस्टम में स्मार्ट सॉकेट, टच पैनल स्विच, रेट्रोफिटेबल कनवर्टर और मोशन सेंसर शामिल हैं, जो बिना किसी नए वायरिंग, ड्रिलिंग या तोड़-फोड़ के मौजूदा घरों में आसानी से फिट हो जाते हैं। यही वजह है कि यह नए घरों के साथ-साथ पुराने घरों और किराए के फ्लैटों के लिए भी उतना ही उपयोगी है।
असल में आपकी कितनी बचत हो सकती है?
पैरामीटर अनुमानित वार्षिक प्रभाव
बिजली की खपत में कमी सालाना करीब 20% की कमी
बचाई गई बिजली (यूनिट्स) हर साल 1,300+ यूनिट्स की बचत
बिल में अनुमानित बचत बिजली सालाना करीब ₹10,000 की बचत
कम हुआ कार्बन उत्सर्जन हर साल लगभग 1.1 टन CO₂ की कमी
पर्यावरण को फायदा हर साल करीब 15 पेड़ लगाने के बराबर
* बचत और कुशलता के ये आंकड़े अनुमानित हैं। ये बदल सकते हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि घर में कौन से उपकरणों का उपयोग हो रहा है, बिजली की खपत का पैटर्न कैसा है, घर का आकार कितना है और स्थानीय बिजली की दरें क्या हैं।
** यह अनुमान एक ऐसे परिवार के आधार पर लगाया गया है जहाँ एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, पंखे, गीज़र और वाशिंग मशीन का इस्तेमाल होता है।
कई बड़े और ज़्यादा बिजली खपत वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने वाले एक सामान्य शहरी परिवार के लिए, ‘ईज़ी होम’ सालाना बिजली की खपत को करीब 15% तक कम कर सकता है। इसका मतलब है कि हर साल 1,300 यूनिट से ज़्यादा बिजली और करीब ₹10,000 की बचत होगी। कुछ परिवार तो अपने बिजली बिल में 20% तक की बचत भी कर सकते हैं। इस बचत का एक बड़ा हिस्सा एयर कंडीशनर और गीज़र जैसे भारी बिजली खपत वाले उपकरणों के स्मार्ट इस्तेमाल से आता है। इसमें ऑटोमेटेड शेड्यूलिंग (तय समय पर चालू-बंद होना) और ऐप पर मिलने वाली यूसेज रिपोर्ट्स बेवजह की कूलिंग और ज़रूरत से ज़्यादा समय तक उपकरण चलने की आदत को कम करती हैं।अजमेर जैसे शहर के लिए, जहाँ लंबी गर्मियों के कारण घरों में कूलिंग (एसी/कूलर) की ज़रूरत ज़्यादा होती है और बिजली की खपत बढ़ जाती है, वहाँ स्मार्ट ऑटोमेशन ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभा सकता है। इंटेलिजेंट एसी ऑप्टिमाइजेशन यानी एसी को ज़रूरत के हिसाब से चलाना, कमरे में लोगों की मौजूदगी पर आधारित कंट्रोल और उपकरणों की शेड्यूलिंग से आराम से समझौता किए बिना बेवजह होने वाली बिजली की खपत को रोकने में मदद मिलती है। इसके साथ ही, एक बड़ा फायदा पर्यावरण को भी होता है। इस तकनीक से जितनी बिजली बचती है, वह हर साल करीब 1.1 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करती है—जो कि सालाना लगभग 15 पेड़ लगाने के बराबर है।
अजमेरवासियों को इससे क्या फायदा होगा?
• रियल-टाइम ट्रैकिंग: सिस्टम में लगे इन-बिल्ट मीटर की मदद से आप यह देख सकते हैं कि कौन सा उपकरण कितनी बिजली खा रहा है। इससे आप बिजली बर्बाद करने वाली अपनी आदतों को पहचान कर उन्हें सुधार सकते हैं।
• अपनी ज़रूरत के हिसाब से कंट्रोल: आप ऐप पर डिवाइस के नाम बदल सकते हैं, अपनी सुविधा के अनुसार चालू-बंद होने का समय तय कर सकते हैं और जैसा चाहें वैसा स्मार्ट-होम सेटअप बना सकते हैं—चाहे एक कमरे के लिए हो या पूरे घर के लिए।
• महंगे उपकरणों की सुरक्षा: इसमें दिया गया इंटेलिजेंट ओवरलोड प्रोटेक्शन आपके एसी, गीज़र और भारी बिजली खपत वाले अन्य उपकरणों के लिए एक बॉडीगार्ड की तरह काम करता है। वोल्टेज के उतार-चढ़ाव या पावर सर्ज (अचानक बिजली का झटका लगना) के दौरान यह उन्हें सुरक्षित रूप से बंद कर देता है।
• पूरी निश्चिंतता: ‘ईज़ी होम’ के सभी स्विच और डिवाइस 2 साल की वारंटी के साथ आते हैं, जिसे टाटा पावर के भरोसेमंद सर्विस नेटवर्क का पूरा सपोर्ट मिला हुआ है।
• घर में किसी तोड़-फोड़ की ज़रूरत नहीं: ये सभी डिवाइस रेट्रोफिट-फ्रेंडली हैं, यानी ये बिना किसी बदलाव के आपके घर के मौजूदा स्विचबोर्ड पर ही सीधे फिट हो जाते हैं।
यह कदम अजमेर में तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण, नए आवासीय इलाकों के विस्तार और डिजिटल तकनीकों को अपनाने की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए उठाया गया है। स्मार्ट लाइफस्टाइल के ज़रूरी कनेक्टेड लिविंग सॉल्यूशंस के लिए यह एक महत्वपूर्ण शहर बना है।
अजमेर में इसकी शुरूआत टाटा पावर की “100 सिटीज़, 1 पर्पस” (100 Cities, 1 Purpose) पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य केवल बड़े महानगरों तक सीमित न रहकर, भारत के हर छोटे-बड़े शहर में आसान, सुरक्षित और बिजली बचाने वाली स्मार्ट होम टेक्नोलॉजी को पहुँचाना है।
*बचत के ये आंकड़े अनुमानित हैं और हर परिवार में उपकरणों के इस्तेमाल व बिजली की खपत के पैटर्न के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।