जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर है, यह कहानी एक शिक्षक की है जिसने अपना पूरा जीवन एक छोटे से गांव में गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए समर्पित कर दिया। उन्हों ने इस गांव में 24 साल बिताए और इस दौरान सैंकड़ों लोगों की जिंदगी संवार दी। लेकिन उन्हें अपनी जिंदगी में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब सरकार ने उन्हेंो उनके दो दशक पुराने घर को खाली करने का फरमान सुनाया। अब वो छोटी-छोटी चीज़ें भी उनसे छूट जाएंगी जो उन्हेंक बेहद अज़ीज थीं, जैसे बरगद का दरख़्ेत उनके जीवन के आखिरी वर्षों में उनका साथी अब नहीं रहेगा। लेकिन तभी एक अनअपेक्षित घटना घटती है जब एक सीनियर सरकारी अधिकारी उनके घर आता है। आइये सुनते हैं कहानी अध्याटपक राम:https://www.youtube.com/watch?v=RZ3-CCSOvIY2. असावरी:यह कहानी अनुलता राज नायर ने लिखी है और नीलेश मिसरा इसे सुना रहे हैं। कहानी की प्रमुख किरदार एक महिला सरकारी अधिकारी असावरी हैं जो मध्या प्रदेश की रहने वाली है। वह कठोर अनुशासन पसंद अधिकारी हैं और सख्तीा तथा पूरी ईमानदारी के साथ भू/भवन निर्माण माफिया से टक्कार लेती हैं। लेकिन इस कठोर अधिकारी का भी एक कोमल मन है जिसमें एक पुराने दोस्ता को लेकर मौहब्बदतें जिंदा हैं। वह भावनाओं के उतार-चढ़ाव को महसूस करती है और उसके साथ आने वाली चुनौतियों से जूझती है। असावरी का जिंदगीनामा हमें कई स्त रों पर प्रेरित करता है। सुनते हैं असावरी की कहानी:https://www.youtube.com/watch?v=IxCsEdbv-Lg
यह एक और मास्टमरपीस है और इसे भी अनुलता राज नायर ने लिखा है तथा नीलेश मिसरा ने सुनाया है। यह कहानी एक बुजुर्ग और सेवानिवृत्त ग्रामीण शिक्षक के इर्द-गिर्द मंडराती है जिनके बेटे की एक बड़े महानगर में काफी ऊंचे पद पर नौकरी लग जाती है। ‘मास्टकरजी’ के जीवन में बस दो ही शौक हैं – पहला अपने बेटे के साथ वक़्तत बिताना और दूसरा, भारत के सभी बड़े शहरों की सैर। हम में से अधिकांश लोगों की तरह उनका इरादा सिर्फ अपनी जड़ों तक सिमटे रहने का नहीं है। लेकिन किस्मेत को कुछ और ही मंजूर है। उनकी यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि मौत भी हमें अपनी जिंदगी का पूरा लुत्फछ लेने से नहीं रोक सकता। आइये सुनें यह दिलचस्पत कहानी:https://www.youtube.com/watch?v=kJ1kB8cxNus

