फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के डॉक्टरों ने 16 वर्षीय किशोरी की गंभीर स्पाइनल डिफॉर्मिटी (रीढ़ की विकृति) का सफल उपचार कर उसकी रीढ़ को लगभग सामान्य स्थिति में ला दिया। सर्जरी से पहले किशोरी की रीढ़ में 70 डिग्री टेडी थी, जिसे सर्जरी के बाद 10 डिग्री से भी कम कर दिया गया। इस प्रकार विकृति में लगभग 90 प्रतिशत सुधार हासिल किया गया। इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व स्पाइन सर्जन डॉ. तरुण दुसाद एवं न्यूरोसर्जन डॉ. अंशुल कुलश्रेष्ठ, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने किया।
मरीज गंभीर एडोलसेंट इडियोपैथिक स्कोलियोसिस ( *Adolescent Idiopathic Scoliosis* ) से पीड़ित थी। यह एक ऐसी चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें रीढ़ की हड्डी बिना किसी स्पष्ट कारण के S या C आकार में एक तरफ मुड़ जाती है। रीढ़ की विकृति के कारण उसके शरीर की मुद्रा में स्पष्ट बदलाव के साथ-साथ उसे गंभीर चिंता, आत्मविश्वास में कमी और सामाजिक रूप से अलग-थलग रहने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा, उसे सांस फूलने और व्यायाम के दौरान जल्दी थकान जैसी शारीरिक समस्याएं भी थीं। डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय पर सर्जरी नहीं की जाती, तो हर वर्ष रीढ़ की वक्रता बढ़ सकती थी, जिससे भविष्य में हृदय और फेफड़ों पर गंभीर प्रभाव पड़ने का जोखिम था।
हल्के स्कोलियोसिस को आमतौर पर ब्रेसिंग या फिजियोथेरेपी के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन 45 से 50 डिग्री से अधिक की गंभीर वक्रता वाले मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। इस मरीज के मामले में सर्जरी का उद्देश्य रीढ़ को सीधा करना, वक्रता को आगे बढ़ने से रोकना, लंबे समय तक रहने वाले दर्द और महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ने वाले दबाव को कम करना तथा मरीज के दीर्घकालिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना था।
लगभग पांच घंटे चली इस जटिल सर्जरी के दौरान मेडिकल टीम ने बेहद सावधानीपूर्वक योजना बनाकर रीढ़ को सही स्थिति में लाने के लिए 21 पेडिकल स्क्रू (Pedicle Screws) लगाए। सर्जरी के बाद रीढ़ की वक्रता को 10 डिग्री से भी कम कर दिया गया, जिससे विकृति में लगभग 90 प्रतिशत सुधार हुआ। सर्जरी के दौरान किसी तरह की जटिलता नहीं हुई। मरीज 48 घंटे के भीतर बिना किसी सहारे के खड़ी होकर चलने लगी और पांचवें दिन उसे अस्पताल से सुरक्षित छुट्टी दे दी गई।
मामले की जानकारी साझा करते हुए *डॉ. तरुण दुसाद, कंसल्टेंट – ऑर्थोपेडिक्स एवं स्पाइन सर्जरी* , फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने कहा, “गंभीर स्कोलियोसिस को ठीक करना स्पाइन सर्जरी की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है। इतनी अधिक वक्रता वाली रीढ़ को सीधा करना बेहद जटिल होता है, क्योंकि स्पाइनल कॉर्ड और महत्वपूर्ण नसों के बेहद करीब काम करते समय हर मिलीमीटर का महत्व होता है। हमने अत्यंत सावधानीपूर्वक उसकी रीढ़ में 21 स्क्रू लगाए, ताकि रीढ़ को सही एलाइनमेंट में लाया जा सके और वक्रता में लगभग 90 प्रतिशत सुधार हासिल हो सके। इतनी बड़ी सर्जरी के केवल दो दिन बाद 16 वर्षीय किशोरी को सीधे खड़े होकर अपने पैरों पर चलते देखना हमारे लिए सबसे बेहतर परिणाम है, जिसकी हम उम्मीद कर सकते थे।”
*डॉ. अंशुल कुलश्रेष्ठ, कंसल्टेंट – न्यूरोसर्जरी एवं स्पाइन सर्जरी* , फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने कहा, “70 डिग्री की रीढ़ की वक्रता केवल किशोरी की शारीरिक मुद्रा और आत्मविश्वास को प्रभावित नहीं करती, बल्कि समय के साथ यह छाती पर दबाव डाल सकती है, जिससे फेफड़ों और हृदय की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। हमारी प्राथमिकता स्पाइनल कॉर्ड पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव डाले बिना रीढ़ को सुरक्षित रूप से सही एलाइनमेंट में लाना था। एडवांस्ड मॉनिटरिंग की मदद से सर्जरी के दौरान किसी तरह की जटिलता नहीं हुई। मरीज ने तेजी से रिकवरी की और पांच दिनों के भीतर अपने घर लौट गई। अब वह एक सक्रिय और स्वस्थ जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।”
डॉ. मनीष अग्रवाल, फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने कहा, “जटिल स्पाइन सर्जरी के लिए असाधारण सटीकता, अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और मजबूत क्रिटिकल केयर सपोर्ट की आवश्यकता होती है। इस तरह की उपलब्धियां स्थानीय स्तर पर विश्वस्तरीय टर्शियरी हेल्थकेयर उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती हैं। हमारा प्रयास है कि राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को जटिल एवं विशेषज्ञ उपचार के लिए दूर-दराज के मेट्रो शहरों की यात्रा न करनी पड़े और उन्हें अपने क्षेत्र में ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।”