राहुल गांधी के मानहानि प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगा दी है। उस निर्णय में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भाषा में संयत बरतने का निर्देश तो दिया है मगर सजा रोक दी। जब गुजरात कोर्ट में सजा सुनाई तो राहुल की लोकसभा सदस्यता को अध्यक्ष ने तुरंत समाप्त कर दिया। यही नहीं, राहुल से उनका आवास भी केंद्र सरकार ने खाली करा लिया। कांग्रेस ने तब बहुत बवाल किया, सड़क पर प्रदर्शन किया। इसलिए अब जब सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी तो इसका व्यापक राजनीतिक असर होना तय है, होना शुरू भी हो गया है।
जिस सजा के कारण सदस्यता निरस्त हुई अगर वही सजा माननीय सुप्रीम कोर्ट ने रोक दी तो प्रथम दृष्टया सदस्यता बहाल होनी चाहिये। यही तर्क लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दिया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को लिखित पत्र भी दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी पीसी कर सदस्यता बहाल करने की मांग की। अब केंद्र सरकार के पाले में गेंद है, क्योंकि उसने ही सजा की घोषणा होते ही तत्काल सदस्यता निरस्त की थी। मगर भाजपा नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद मौन साध रखा है, ठोस जवाब ही नहीं दे रहे। कोर्ट के निर्णय के अन्य पहलुओं पर जरूर विचार कर रहे हैं।
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने तो दलीलों के आधार पर रोक का निर्णय दिया है। मगर कांग्रेस इससे उत्साह में आ गई है। प्रियंका गांधी ने सबसे पहले रोक के निर्णय पर खुशी जताई। कांग्रेस नेताओं को कोर्ट के निर्णय से आत्म बल मिला है, इसमें कोई शक नहीं। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व तेलंगाना विधानसभाओं के चुनाव पर भी असर होगा। एक तरफ कांग्रेस जहां दुगुने जोश से सक्रिय हुई हैं वहीं न्याय की जीत बताकर कांग्रेस पूरी तरह से भाजपा पर हमलावर भी हो गई है। कोर्ट का निर्णय है इसलिए लोग भी इसके असर में आ रहे हैं। इसे कांग्रेस मुद्दा भी बनायेगी। इस निर्णय के बाद अडानी के मसले पर भी राहुल ज्यादा आक्रामक होंगे व केंद्र सरकार को घेरेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अब दोनो पक्ष समीक्षा भी करा रहे हैं। कांग्रेस तो इसलिए करा रही है ताकि राहुल की सदस्यता बहाल हो और वो लोकसभा में आकर फिर से अपने पुराने मुद्दे उठाये, भाजपा उस स्थिति में निरुत्तर रहेगी। वहीं राहुल को वापस आने से रोकने के लिए भी विकल्प तलाशे जा रहे हैं। क्योंकि यदि सजा पर रोक रहती है फिर उनको अगला चुनाव लड़ने से भी नहीं रोका जा सकेगा। उसका अर्थ ये हुआ कि आम चुनाव में फिर राहुल की सदस्यता भी उसमें एक मुद्दा होगा और उसका सीधा असर मतदाताओं पर पड़ेगा। यही कारण है कि इंडिया गठबंधन के नेता भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से खुश हैं। क्योंकि इससे गठबंधन को भी शक्ति मिलेगी। गठबंधन खास तौर पर उत्तर भारत में इस मसले पर भाजपा को घेरना चाहता है। कुल मिलाकर राहुल की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने जो रोक लगाई है उसका व्यापक राजनीतिक असर होगा।

  • मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
    वरिष्ठ पत्रकार