पंडित रमण गिरधारी के अनुसार सनातन धर्म के उपास्य देवो में श्री गणपति भगवान का स्थान सर्वोपरि है वे विघ्नों को हरने वाले और अग्रपूज्य है गणेश चतुर्थी आज। अनंत चतुर्दसी के दिन भगवान गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन होता है। यह मान्यता है कि भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था! इस दिन घरों में, व्यापार में, बड़ी जगहों पर, और हर घर के मुख्य दरवाजो पर गणेश जी का पूजन होता है गणेश जी की उपासना करने से घर मे संपन्नता, समृद्धि, सौभाग्य और धन का समावेश होता है ! शास्त्रो में इस किये गए व्रत और पूजन का विशेष महत्व बतलाया गया है किसी भी नए या अच्छे काम की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाना शुभ माना जाता है वेसे तो तो सभी जगह यह त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाते है लेकिन महाराष्ट्र में यह बहुत प्रचलित है वहा इस दिन का इंतजार करते है! पंडित रमण गिरधारी जी के अनुसार सभी पार्थिव गणेश जी की प्रतिमा को लाकर पूजन करते है लेकिन शास्त्रो में कई प्रकार से बने गणपति का उल्लेख मिलता है जिसमे गुड़ की प्रतिमा , हरिद्रा की प्रतिमा, गोधूमान्न और अन्य !कुछ लोग गणेश चतुर्थी के अगले दिन गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करते है और कुछ गणेश चतुर्थी के बाद 3,5,7,10 वे दिन और 11 वे दिन पर गणपति विसर्जन करते है।


भगवान गणपति का पूजन कैसे करे : जो श्रद्धालु गणेश जी की मूर्ति को घर मे या कही पर भी लेकर आते है तो सबसे पहले मूर्ति को कपड़े से ढककर लाना चाहिए गणपति पूजन से पहले सूर्य भगवान का पूजन करना चाहिए ! हमने देखा है कि सनातन धर्म किसी भी देवी देवताओं का पूजन हो तो सर्वप्रथम भगवान गणपति का पूजन करते है लेकिन पूजन में  भगवान गणेश जी अगर प्रधान देवता हो तो उनसे पहले सूर्य भगवान का पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है ! विद्वान ब्राह्मण के द्वारा विधि विधान से भगवान गणपति की प्राण प्रतिष्ठा कर, स्नान व पृथक पृथक द्रव्यो से अभिषेक आदि कर वस्त्र पहनाए, षोड्षोपचार पूजन करके साथ मे पात्र पूजन आवरण सहित अङ्गों का पूजन अर्चन करे! नैवेद्य में विशेष रूप से मोदक, चूरमा,कवीठ,लाजा का भोग लगाएं साथ मे पान, सुपारी , फल , दक्षिणा लगाकर आरती और पुष्पांजलि करे।

जिनकी कुंडली मे कोई प्रकार का दोष , व्यापार में बाधा या आर्थिक समस्या हो तो करे भगवान गणपति को इन उपायों से प्रसन्न सर्व मनोकामना हेतु पार्थिव गणपति का पूजन व अभिषेक करें। चारो पुरुषार्थ की प्राप्ति के लिए गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करे। गणपति सहस्त्रार्चन करने से भगवान गणेश जी कृपा पूर्ण रूप से बनी रहती है। समस्त प्रकार के संकट दूर करने के लिए संकटनाशन स्तोत्रं और भालचंद्र का पाठ करे। शोक निवारण व रोगोपद्रव को शांत करने के लिए मयूरेश स्तोत्रं का पाठ और साथ मे मधुत्रय व लाजा से हवन करें। आर्थिक संकट का भार हो तो ऋणहर्ता गणपति अनुष्ठान करे। संतान प्राप्ति के लिए सन्तान गणपति स्तोत्रम का पाठ करे। विवाह दोष दूर करने के लिए त्रैलोकयमोहन गणेश का अनुष्ठान करें।(PB)